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Punjab Election: पंजाब विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, 'नशा' बना सबसे बड़ा मुद्दा; आमने-सामने सियासी दल

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. नशे का मुद्दा सभी प्रमुख पार्टियों के चुनावी अभियान के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है. आम आदमी पार्टी अपने नशा विरोधी अभियान को उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Punjab Election: पंजाब विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, 'नशा' बना सबसे बड़ा मुद्दा; आमने-सामने सियासी दल
Courtesy: Pinterest

चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 17 सितंबर को समाप्त होने में छह महीने का समय रह जाएगा. ऐसे में सितंबर का यह दौर पंजाब की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है. आम आदमी पार्टी, भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को रफ्तार देने की तैयारी कर ली है.

इस बार चुनावी राजनीति में नशे का मुद्दा सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल होता दिखाई दे रहा है. सत्ता में आने के बाद से आम आदमी पार्टी लगातार नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करती रही है. पार्टी की ओर से समय-समय पर अभियान की प्रगति और कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे जाते हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान अब अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुट गए हैं.

भाजपा का क्या है प्लान?

भाजपा भी नशे के मुद्दे को लेकर पंजाब में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही नक्सलवाद के बाद देश से नशे की समस्या खत्म करने को मिशन बताते रहे हैं. इसी कड़ी में भाजपा 18 सितंबर से पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली करीब चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता यात्राओं और रैलियों का आयोजन करेगी. इसे पार्टी के पंजाब में चुनावी शंखनाद के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस की क्या है तैयारी?

कांग्रेस ने भी नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है. पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट 15 सितंबर से अपने पहले पंजाब दौरे की शुरुआत करेंगे. दौरे के पहले ही दिन वह तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले को मुद्दा बनाकर रोष मार्च और प्रदर्शन करेंगे. कांग्रेस की ओर से कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का कार्यक्रम भी रखा गया है.

सभी प्रमुख नेता एक मंच पर

सचिन पायलट के दौरे में कांग्रेस अपनी एकजुटता दिखाने की भी कोशिश करेगी. पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाने की तैयारी है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की है. इससे कांग्रेस के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश साफ दिखाई देती है.

वहीं, पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने की योजना बना चुका है. ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए बड़ा हथियार बनता नजर आ रहा है. सत्ता पक्ष जहां अपने अभियानों को उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकता है, वहीं विपक्ष इसी मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने की कोशिश करेगा. आने वाले महीनों में पंजाब की चुनावी राजनीति में नशे के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है.