चंडीगढ़: मंगलवार की सुबह जब आम लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में जुटे थे, तब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की टीमें पंजाब और हरियाणा के नौ जिलों में एक साथ दस्तक दे रही थीं. यह कोई सामान्य तलाशी नहीं थी, बल्कि यह उस खतरनाक जाल को उखाड़ने की कोशिश थी जिसे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी ने भारत की जमीन पर बड़ी सावधानी से बुना था.
NIA की टीमों ने दोनों राज्यों में कुल 18 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की. इस दौरान कई संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई और उनकी गतिविधियों, संपर्क नेटवर्क तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई गईं. जांचकर्ताओं ने मौके से कई डिजिटल डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए.
छापेमारी के दौरान बरामद सभी सामग्री को फॉरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है. एजेंसी का उद्देश्य साफ है- हर तार को खींचकर उस बड़े षड्यंत्र तक पहुंचना जो सरहद पार से बुना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों के ठिकानों पर तलाशी ली गई, उनमें से कुछ को आगे की पूछताछ के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं. जांच में इन लोगों की भूमिका और उनके आका से संबंधों की परतें अभी और खुलनी हैं.
इस पूरे मामले के केंद्र में है एक नाम- शहज़ाद भट्टी. एक समय पंजाब के अपराध जगत में सक्रिय यह शख्स अब पाकिस्तान में रहकर भारत के खिलाफ आतंकी नेटवर्क चलाने का काम कर रहा है. उसका सफर एक स्थानीय गैंगस्टर से होते हुए एक सुनियोजित आतंकवादी तक पहुंचा है और इसी खतरनाक परिवर्तन ने NIA को उसके पीछे लगाया है.
अप्रैल 2026 में NIA ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया और एक अन्य आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की. लेकिन जांच की कड़ियां रुकी नहीं, वे उन घटनाओं तक जा पहुंची जिन्होंने पूरे उत्तर भारत को हिला कर रख दिया था.
जांच में सामने आया कि मार्च 2025 में जालंधर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर हुए ग्रेनेड हमले के तार सीधे भट्टी से जुड़े हैं. यह हमला उस दौर में हुआ था जब देश में सोशल मीडिया पर सक्रिय चेहरों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही थी.
इसके बाद नवंबर 2025 में सिरसा, हरियाणा के महिला पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट की साजिश भी भट्टी ने ही रची थी. सिरसा मामले में NIA ने मई 2026 में भट्टी और पाकिस्तान में मौजूद एक अन्य हैंडलर सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच समेत नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन के बाहर हुए कार बम धमाके का सिलसिला भी इसी नेटवर्क से जुड़ता है. इस मामले में गिरफ्तार एक आरोपी का सीधा संपर्क भट्टी से पाया गया- जो यह साबित करता है कि सीमा पार से इन हमलों की पटकथा कितनी बारीकी से लिखी गई थी.
NIA की यह कार्रवाई किसी एक मामले तक सीमित नहीं है, यह एक बड़ी रणनीतिक जांच का हिस्सा है जिसमें तीन अलग-अलग आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क मामलों को एक साथ खंगाला जा रहा है. एजेंसी का पूरा जोर इस बात पर है कि भट्टी के सहयोगियों और उन तमाम लोगों की पहचान की जाए जो इन मामलों में किसी न किसी भूमिका में शामिल रहे.
जानकारों का मानना है कि यह छापेमारी उस बड़े ऑपरेशन की अगली कड़ी है जो पाकिस्तान से संचालित होने वाले नेटवर्क को भारत के भीतर से निष्क्रिय करने के मकसद से चलाया जा रहा है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ और खुलासे हो सकते हैं.