पंजाब के किसानों के लिए लंबे समय से जिस बदलाव का इंतजार था, वह अब जमीन पर दिखाई देने लगा है. सरकार द्वारा सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप कई दशकों बाद नहरों का पानी सीधे खेतों तक पहुंचने लगा है.
इससे उन क्षेत्रों में भी सिंचाई संभव हो सकी है, जहां किसान अब तक केवल बारिश या भूमिगत जल पर निर्भर थे.नहरों में नियमित जलापूर्ति होने से किसानों के बीच उत्साह का माहौल है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सिंचाई मिलने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ किसानों की आय पर भी पड़ेगा. सरकार के अनुसार नहर प्रणाली के विस्तार और पुनर्जीवन का लाभ लगभग 76 लाख एकड़ कृषि भूमि को मिल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि नहर आधारित सिंचाई किसानों को डीजल या बिजली से चलने वाले ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी. इससे खेती की लागत घटेगी और कृषि अधिक लाभकारी बन सकेगी. इसके अलावा किसान अब एक से अधिक फसल लेने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे.
ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ 'ਚ ਕਿਸਾਨ ਮੁਕੰਮਲ ਰੂਪ 'ਚ ਖ਼ੁਸ਼ !!
— AAP Punjab (@AAPPunjab) June 26, 2026
👉 ਕਈ ਦਹਾਕਿਆਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤਾਂ 'ਚ ਪਹੁੰਚਿਆ ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ
👉 ਕਰੀਬ 76 ਲੱਖ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ ਨਾਲ਼ ਹੋ ਰਹੀ ਸਿੰਜਾਈ
👉 ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ ਵਰਤਣ ਨਾਲ਼ ਧਰਤੀ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਪੱਧਰ 'ਚ ਵੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਸੁਧਾਰ
- @BaltejPannu
'ਆਪ' ਪੰਜਾਬ ਮੀਡੀਆ ਇੰਚਾਰਜ pic.twitter.com/WWoQoN4j9P
नहरों में पानी का नियमित प्रवाह केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भूजल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है. जल विशेषज्ञों के अनुसार नहरों से रिसने वाला पानी आसपास के क्षेत्रों में भूजल का प्राकृतिक पुनर्भरण करता है. इससे उन इलाकों में भी राहत मिलने की संभावना है, जहां लगातार गिरते भूजल स्तर ने चिंता बढ़ा दी थी.
सरकार का मानना है कि मजबूत सिंचाई व्यवस्था कृषि क्षेत्र के विकास की आधारशिला है. नहरों के माध्यम से जल उपलब्ध होने से किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं का सामना करने में भी आसानी होगी. इससे खेती अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बन सकेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नहरों का रखरखाव और जल वितरण इसी प्रकार प्रभावी ढंग से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है. साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी और किसानों का जीवन स्तर बेहतर होने की उम्मीद है.