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आज पंजाब विधानसभा में वित्तीय प्रस्ताव, विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा, विपक्ष के हंगामे के आसार

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी उपक्रम समिति की 129वीं रिपोर्ट सदन में रखेंगे. इसके अलावा विभिन्न विभागों की 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक रिपोर्टें और लेखा-जोखा भी पेश किए जाएंगे. इन दस्तावेजों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल सरकार से कई सवाल पूछ सकते हैं.

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Edited By: Antima Pal
आज पंजाब विधानसभा में वित्तीय प्रस्ताव, विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा, विपक्ष के हंगामे के आसार
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चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में आज महत्वपूर्ण वित्तीय और कृषि मुद्दों पर चर्चा होगी. मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन में काफी हलचल रहने की उम्मीद है. प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद सरकार कई वित्तीय प्रस्ताव, विधेयक और अनुदान मांगें पेश करेगी.

आज पंजाब विधानसभा में वित्तीय प्रस्ताव

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी उपक्रम समिति की 129वीं रिपोर्ट सदन में रखेंगे. इसके अलावा विभिन्न विभागों की 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक रिपोर्टें और लेखा-जोखा भी पेश किए जाएंगे. इन दस्तावेजों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल सरकार से कई सवाल पूछ सकते हैं.

विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा

आज का दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के रूप में भी याद किया जाएगा. सदन में इन तीनों महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए एक संकल्प प्रस्ताव लाया जाएगा. प्रस्ताव में युवाओं को उनके विचारों से जोड़ने और उनके बलिदान को व्यापक सम्मान देने की बात कही गई है.

कृषि और किसान कल्याण से जुड़े मुद्दे भी आज की कार्यसूची में प्रमुख हैं. सरकार केंद्र से कृषि को राज्य सूची का विषय बनाने की मांग करेगी. साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने, कृषि अनुसंधान को मजबूत करने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा होगी.

विपक्ष पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ सक्रिय है. बुधवार को हुए हंगामे के बाद आज भी सदन में तीखी बहस और नारेबाजी की संभावना बनी हुई है. कृषि संबंधी प्रस्तावों पर विपक्षी दल किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर दबाव बना सकते हैं.

पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है. इसलिए इन प्रस्तावों के माध्यम से राज्य सरकार केंद्र के सामने किसानों के हितों को मजबूती से रखने की कोशिश करेगी. वित्तीय विधेयकों और अनुदान मांगों पर चर्चा से सरकार की प्राथमिकताएं भी साफ होंगी.