पंजाब कांग्रेस में लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव अब पार्टी हाईकमान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच जारी विवाद को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह सतर्क हो गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. माना जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद पंजाब कांग्रेस को लेकर बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष टीम को जिम्मेदारी सौंपी है. यह टीम प्रदेश में हो रही हर राजनीतिक गतिविधि, नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और संगठन की स्थिति का विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट सीधे राहुल गांधी के कार्यालय को सौंप रही है. पार्टी नेतृत्व यह जानना चाहता है कि नेताओं के बीच का विवाद केवल व्यक्तिगत मतभेद तक सीमित है या इसका असर संगठन, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ रहा है.
मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिले. बैठक के दौरान उन्होंने पंजाब कांग्रेस में चल रहे विवाद को लेकर अपना पक्ष रखा. सूत्रों के मुताबिक चन्नी ने कहा कि उन्हें जानबूझकर गुटबाजी का चेहरा बनाकर पेश किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है, जबकि पोस्टरवार और नारेबाजी को बढ़ावा देने में उनका कोई हाथ नहीं है. चन्नी ने यह भी दावा किया कि राजा वड़िंग के समर्थक ही उनके नाम के नारे लगवाकर विवाद को हवा दे रहे हैं.
पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल इन दिनों प्रदेश में 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' अभियान चला रहे हैं. इस अभियान के दौरान कई जिलों में पार्टी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग भी शामिल हो रहे हैं. इसी दौरान कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने चन्नी के समर्थन में नारे लगाए. बरनाला में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की और कुर्सियां चलने तक की नौबत आ गई. इन घटनाओं ने हाईकमान की चिंता और बढ़ा दी है.
सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस में चल रहे विवाद को लेकर कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल पहले ही अपनी अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंप चुके हैं. अब राहुल गांधी ने मौजूदा हालात को देखते हुए एक और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि अंतिम फैसला तथ्यों के आधार पर लिया जा सके. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में किसी भी तरह की गुटबाजी कांग्रेस के चुनावी अभियान को कमजोर कर सकती है.