Punjab Siropa Controversy: कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक नए विवाद में घिर गए हैं. पंजाब के अमृतसर में गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा साहिब में उन्हें सिरोपा पहनाए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने नाराजगी जताई है और मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. यह घटना 15 सितंबर 2025 को उस समय हुई जब राहुल गांधी पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे थे.
राहुल गांधी ने सबसे पहले अमृतसर और गुरदासपुर जिलों के कई बाढ़ग्रस्त गांवों का दौरा किया और प्रभावित लोगों से मुलाकात की. इसके बाद वे रामदास क्षेत्र के गुरुद्वारा श्री समाधि बाबा बुड्ढा साहिब पहुंचे. यहां उन्होंने अरदास की और गुरुद्वारे के प्रबंधन की ओर से उन्हें सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया गया. सिरोपा सिख परंपरा में धार्मिक और आध्यात्मिक सम्मान का प्रतीक है. आमतौर पर यह सम्मान धार्मिक हस्तियों, रागी जत्थों और महापुरुषों को ही दिया जाता है.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस सम्मान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया. वीडियो सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया. SGPC ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि उनके पूर्व निर्णय के अनुसार, किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को गुरुद्वारे के दरबार साहिब में सिरोपा प्रदान करना वर्जित है. SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि यह नियमों का उल्लंघन है और इस पर तुरंत कार्रवाई होगी.
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने गुरुद्वारा श्री समाध बाबा बुड्ढा जी साहिब पहुंचकर मत्था टेका और अरदास की।
— Congress (@INCIndia) September 15, 2025
📍 अमृतसर, पंजाब pic.twitter.com/unYq8ArMk9
STORY | SGPC to probe matter of honouring Rahul Gandhi at Amritsar gurdwara
— Press Trust of India (@PTI_News) September 15, 2025
Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (SGPC) chief Harjinder Singh Dhami on Monday said it will probe the matter of honouring Congress leader Rahul Gandhi at historic gurdwara Baba Budha Sahib in… pic.twitter.com/PuvCZxZSt3
SGPC ने गुरुद्वारा प्रबंधन के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं. धामी ने कहा कि एक दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. अगर किसी कर्मचारी या प्रबंधन समिति के सदस्य को दोषी पाया गया तो सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे. जांच के दौरान वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी शामिल किए जाएंगे.
इस विवाद ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे राहुल गांधी के प्रति सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं सिख संगठनों का मानना है कि धार्मिक परंपराओं को राजनीति से अलग रखना चाहिए. SGPC का रुख साफ है कि गुरुद्वारों की परंपराओं और मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.