32 लाख देने के बाद भी नहीं मिला फ्लैट! बिल्डर पर फोरम का शिकंजा, 3 लाख मुआवजा

मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने न्यू चंडीगढ़ की हाउसिंग परियोजना में तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देने पर बिल्डर को सेवा में कमी का दोषी माना. फोरम ने खरीदार को 3 लाख रुपये मुआवजा और जमा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया.

AI
Meenu Singh

न्यू चंडीगढ़ में फ्लैट खरीदने वाले एक उपभोक्ता को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है. मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देने के मामले में बिल्डर कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है. फोरम ने माना कि कंपनी ने बिक्री समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया. इसके चलते खरीदार को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ी. अब फोरम ने मुआवजे और अन्य राहत देने के निर्देश जारी किए हैं.

समय पर नहीं मिला फ्लैट का कब्जा

शिकायतकर्ता अरविंदर अरोड़ा ने साल 2022 में न्यू चंडीगढ़ की एक हाउसिंग परियोजना में 3 बीएचके फ्लैट बुक कराया था. समझौते के अनुसार मार्च 2023 तक फ्लैट का कब्जा मिलना था. उन्होंने कुल कीमत में से 32 लाख रुपये जमा भी कर दिए, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हुआ और कब्जा नहीं दिया गया.

देरी से बढ़ी खरीदार की परेशानी

शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि बिल्डर लगातार नई तारीखें देकर कब्जा टालता रहा. इस दौरान उन्हें अपने खर्च पर रहने की दूसरी व्यवस्था करनी पड़ी. बाद में कंपनी ने अस्थायी आवास उपलब्ध कराया, लेकिन बिजली और अन्य खर्च नहीं उठाए. साथ ही अनुबंध से अधिक राशि की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया गया.


फोरम ने बिल्डर को माना जिम्मेदार

सभी दस्तावेज और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फोरम ने माना कि तय समय पर फ्लैट का कब्जा देना बिल्डर की जिम्मेदारी थी. ऐसा नहीं करना सेवा में कमी माना गया. फोरम ने स्पष्ट किया कि खरीदार केवल समझौते के अनुसार बची हुई 8.40 लाख रुपये की राशि ही देगा.

कब्जे के साथ जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे

फोरम ने आदेश दिया कि शेष राशि मिलने के बाद कंपनी खरीदार को फ्लैट का कब्जा, आक्यूपेशन सर्टिफिकेट, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और बिक्री विलेख उपलब्ध कराए. साथ ही 3 लाख रुपये मुआवजा और जमा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

वैकल्पिक आवास पर भी दिया स्पष्ट आदेश

फोरम ने कहा कि जब तक खरीदार को वास्तविक कब्जा नहीं मिल जाता, तब तक बिल्डर उपलब्ध कराया गया वैकल्पिक आवास वापस नहीं ले सकता. यदि ऐसा किया जाता है, तो कंपनी को कब्जा मिलने तक जमा राशि पर निर्धारित ब्याज का भुगतान जारी रखना होगा. इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.