चंडीगढ़ नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े 116 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है. मामले की जांच कर रही सीबीआई लगातार दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में जुटी है. जांच की रफ्तार बढ़ने के साथ ही कई अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस मामले का संबंध आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा धनराशि से जुड़ा बताया जा रहा है. जांच एजेंसी पहले भी कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और अब आगे की कार्रवाई पर नजरें टिकी हुई हैं. प्रशासनिक और वित्तीय हलकों में इस मामले को लेकर हलचल बढ़ गई है.
घोटाले की शुरुआती जांच के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए थे. उनसे पूछताछ भी की गई, लेकिन अब तक किसी अधिकारी को इस मामले में आरोपित नहीं बनाया गया. हालांकि, सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ अधिकारियों की भूमिका को लेकर नए सिरे से दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है. इसी कारण मामले से जुड़े लोगों के बीच बेचैनी बढ़ी हुई बताई जा रही है.
इस मामले की जांच पहले चंडीगढ़ पुलिस के पास थी, लेकिन पिछले महीने सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली. जांच में यह आरोप सामने आया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी एफडी में जमा करोड़ों रुपये का कथित दुरुपयोग किया गया. आरोप है कि धनराशि निकालने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव कर फर्जी एफडी दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके.
जांच के दौरान सामने आया कि स्मार्ट सिटी परियोजना समाप्त होने के बाद बची हुई राशि नगर निगम के खातों में स्थानांतरित की जानी थी. इसी प्रक्रिया में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ी एफडी रसीदों की जांच हुई. जांच में कथित तौर पर यह पाया गया कि जिन एफडी का रिकॉर्ड मौजूद था, उनमें जमा रकम पहले ही निकाली जा चुकी थी. इसके बाद पूरे मामले ने बड़ा रूप ले लिया.
आरोप है कि धनराशि को अलग-अलग शेल कंपनियों के खातों में भेजा गया और बाद में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया गया. अब सीबीआई बैंकिंग लेनदेन, संबंधित कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है. मामले में अब तक 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें स्मार्ट सिटी परियोजना और बैंक से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं. जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.