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एमपी में है 'चोरों का गांव', जहां हर तीसरा व्यक्ति साधु के वेश में दूसरी जगहों पर जाकर करता है चोरी; जानें अनोखी कहानी

सिंगरौली जिले के लमिदह गांव को चोरी के मामलों के कारण ‘चोरों का गांव’ कहा जाता है. गांव के कई लोगों पर चोरी और सेंधमारी के केस दर्ज हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार रोजगार की कमी इसकी एक वजह है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
एमपी में है 'चोरों का गांव', जहां हर तीसरा व्यक्ति साधु के वेश में दूसरी जगहों पर जाकर करता है चोरी; जानें अनोखी कहानी
Courtesy: Pinterest

सिंगरौली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में एक ऐसा गांव है जहां हर तीसरा निवासी चोरी के आरोप का सामना कर रहा है. आस-पास के इलाकों में इसे आम बोलचाल की भाषा में 'चोरों का गांव' कहा जाता है. स्थानीय निवासियों के अनुसार इस लंबे समय से चली आ रही प्रवृत्ति का मूल कारण नौकरियों की कमी है. इसके अलावा कानून व्यवस्था में ढिलाई को भी एक कारण बताया जाता है.

विशेष रूप से लमिडाह गांव सिंगरौली जिले के अंतर्गत आता है. गांव में लगभग 600 पंजीकृत मतदाता हैं और यह जमगाड़ी पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है. गांव में कुल 300 वयस्क पुरुष हैं, इनमें से 94 पर सेंधमारी, अनाधिकार प्रवेश और चोरी का आरोप है. ये ऐसे मामले हैं जो आस-पास के पुलिस थानों में आधिकारिक तौर पर दर्ज किए गए हैं. पुलिस इन आरोपी व्यक्तियों पर लगातार नजर भी रखती है.

कैसे रखते हैं पुलिस वाहनों पर नजर?

इसके अलावा इस गांव के निवासियों की तलाश अन्य जिलों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी है. कुछ समय पहले पुलिस ने पड़ोसी जिले सीधी में रिपोर्ट किए गए दस से अधिक चोरी के मामलों के सिलसिले में यहां एक तलाशी अभियान चलाया था. आरोपी व्यक्ति गांव में प्रवेश करने वाले पुलिस वाहनों पर नजर रखने के लिए अस्थायी निगरानी टावर भी बना लेते थे.

गांव के निवासी ने क्या बताया?

गांव के एक निवासी रामशंकर बसोर ने कहा, 'यह प्रथा बहुत लंबे समय से चली आ रही है और इससे हमें शर्मिंदगी महसूस होती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां हर कोई ऐसी गतिविधियों में शामिल है. हमारे गांव में कई शिक्षित युवा हैं जो बहुत ही प्रतिष्ठित पदों पर काम कर रहे हैं.' उन्होंने बताया कि लमिडाह में कम से कम 10 इंजीनियर और कई सरकारी स्कूल शिक्षक रहते हैं.  रामशंकर बसोर खुद एक कॉमन सर्विस सेंटर चलाते हैं, और उनकी पत्नी ग्राम परिषद की चुनी हुई सदस्य पंच हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि अगर गांव के पढ़े-लिखे लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को समझाने या डांटने की कोशिश करते हैं, तो वे लोग अक्सर मन में रंजिश पाल लेते हैं और उनके प्रति दुश्मन जैसा रवैया अपना लेते हैं. 

जमगाड़ी पंचायत के सरपंच ने क्या कहा?

जमगाड़ी पंचायत के सरपंच कृष्ण राम वैश्य ने कहा कि अब स्थानीय लोग अपने ही इलाके में चोरी करने से बचते हैं और इसके बजाय दूसरे राज्यों में जाकर चोरी करते हैं. इन दूसरे इलाकों में घूमते समय उनमें से कुछ लोग साधु का भेष अपना लेते हैं. 

सिंगरौली के पुलिस अधीक्षक (SP) मोहम्मद यूसुफ कुरैशी ने कहा, 'हम इस गांव के आरोपी लोगों का आपराधिक इतिहास इकट्ठा कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए दूसरे जिलों से भी उनके आपराधिक रिकॉर्ड मंगवा रहे हैं.'