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India Daily

पहले चाय और बिस्किट, फिर लाठियां, किसानों ने खाद को लेकर अधिकारियों को किया कमरे में बंद

मध्य प्रदेश में यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं. रेवांचल क्षेत्र के करहिया मंडी में किसानों का धैर्य टूट गया और उन्होंने अधिकारियों को कमरे में बंद कर दिया. प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने के लिए पहले किसानों को चाय-बिस्किट दिए गए, लेकिन देर रात हंगामा बढ़ा और पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. सरकार दावा कर रही है कि पर्याप्त खाद उपलब्ध है, जबकि किसान लंबे इंतजार और खाली हाथ लौटने की शिकायत कर रहे हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
पहले चाय और बिस्किट, फिर लाठियां, किसानों ने खाद को लेकर अधिकारियों को किया कमरे में बंद
Courtesy: web

बुआई का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में खाद संकट ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. जगह-जगह यूरिया लेने के लिए किसान घंटों कतारों में खड़े हैं. रेवांचल के करहिया मंडी में तो हालात बिगड़ गए जब नाराज किसानों ने तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को कमरे में बंद कर दिया. पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए बल प्रयोग किया, हालांकि प्रशासन इसे 'हल्की कार्रवाई' बता रहा है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि खाद वितरण पारदर्शी और सुचारू तरीके से होना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अव्यवस्था के लिए कलेक्टरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. सीएम ने कहा कि जिला प्रशासन लगातार खाद की उपलब्धता की समीक्षा करे और किसानों को सही जानकारी दे ताकि भ्रम की स्थिति न बने. इसके साथ ही उन्होंने डबल लॉक गोदामों और बिक्री केंद्रों पर निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बिक्री केंद्र खोलने का भी आदेश दिया.

करहिया मंडी में बवाल

रेवा जिले के करहिया मंडी में मंगलवार रात हालात बिगड़ गए. किसानों की लंबी कतारें दिनभर लगी रहीं. प्रशासन ने तनाव कम करने के लिए चाय-बिस्किट बांटे, लेकिन रात होते-होते गुस्सा फूट पड़ा. किसानों ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार और मार्कफेड अधिकारियों को कमरे में बंद कर दिया. इसके बाद पुलिस को मौके पर आना पड़ा और वीडियो में दिखा कि किसानों को हटाने के लिए डंडों का इस्तेमाल किया गया. हालांकि प्रशासन का दावा है कि 'लाठीचार्ज' नहीं हुआ, बल्कि हल्का बल प्रयोग किया गया.

क्या है किसानों की परेशानी?

किसानों का कहना है कि उन्हें दो-दो दिन कतार में खड़ा रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. कई किसान दूर-दराज के गांवों से यूरिया लेने आए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ वादे और आश्वासन मिले. एक किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा 'अगर बुआई के समय यही हाल है तो आगे हम क्या करेंगे?' किसानों का धैर्य टूटता जा रहा है और प्रशासन की बातों पर भरोसा भी कम हो रहा है.

सरकार का दावा और हकीकत

सरकार का कहना है कि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और सिर्फ धैर्य रखने की जरूरत है. रेवांचल प्रशासन ने बताया कि 53 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 88 लाइसेंस रद्द किए गए और 406 बिक्री केंद्रों पर प्रतिबंध लगाया गया है ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके. लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को इन आंकड़ों से कोई राहत नहीं मिल रही. वे रोजाना घंटों लाइन में खड़े होकर भी निराश लौट रहे हैं, जिससे उनकी नाराजगी लगातार बढ़ रही है.