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तोहफे में भी फर्जीवाड़ा, रेलवे ने रिटायर्ड कर्मचारियों को दिए नकली चांदी के सिक्के

मध्य प्रदेश में रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान में दिए गए चांदी के सिक्के नकली निकले. जांच में सामने आया कि सिक्कों में चांदी मात्र 0.23 प्रतिशत थी, जिसके बाद पुलिस और विजिलेंस जांच शुरू हुई.

Kanhaiya Kumar Jha
तोहफे में भी फर्जीवाड़ा, रेलवे ने रिटायर्ड कर्मचारियों को दिए नकली चांदी के सिक्के
Courtesy: Gemini AI

भोपाल: भारतीय रेलवे में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पश्चिम मध्य रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवा स्मृति के तौर पर दिए गए चांदी के सिक्के नकली पाए गए. जब कर्मचारियों ने इन्हें बेचने की कोशिश की, तब सच्चाई सामने आई. अब इस मामले में पुलिस और रेलवे विजिलेंस की जांच जारी है.

सम्मान का तोहफा या धोखा

पश्चिम मध्य रेलवे के जिन कर्मचारियों को सेवा के सम्मान में चांदी के सिक्के दिए गए थे, उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि यह तोहफा उनके साथ धोखे की कहानी बन जाएगा. भोपाल में कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों ने जब सिक्कों को जांच के लिए दिया, तो पता चला कि उनमें चांदी केवल 0.23 प्रतिशत है और बाकी हिस्सा तांबे का है.

रिटायर्ड कर्मचारी ने दर्ज कराई शिकायत

इस मामले से आहत रिटायर्ड अधिकारी डीके गौतम ने बजरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई. उनका कहना है कि यह विभाग की ओर से मिला सम्मान समझा गया था, लेकिन नकली सिक्के मिलने से खुद को ठगा हुआ महसूस किया. पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और रेलवे से भी पूरी जानकारी मांगी गई है.

कैसे सामने आया पूरा फर्जीवाड़ा?

जानकारी के मुताबिक इंदौर की एक कंपनी एम.एस. वायबल डायमंड्स को 3,640 चांदी के सिक्कों का ऑर्डर दिया गया था. हर सिक्के की कीमत करीब 2,500 रुपये तय की गई थी. कंपनी ने 3,631 सिक्के सप्लाई किए, लेकिन इनमें ज्यादातर तांबे के निकले. इससे रेलवे को करीब 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

कंपनी पर गिरी गाज, विजिलेंस सक्रिय

फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ ने बताया कि रेलवे की विजिलेंस टीम ने भी पुलिस को आवेदन दिया है. बजरिया थाना पुलिस का कहना है कि रेलवे से पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी.

पहले भी लग चुके हैं आरोप

यह पहला मौका नहीं है जब इस कंपनी का नाम रेलवे से जुड़े फर्जीवाड़े में सामने आया हो. सितंबर 2025 में उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में भी इसी तरह का मामला उजागर हुआ था. वहां कर्मचारियों को दिए गए मेडल नकली पाए गए थे. उस घोटाले की रकम करीब 30 से 40 लाख रुपये आंकी गई थी.