राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका! मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, BJP की राह हुई आसान

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म आपराधिक मामला छुपाने के कारण खारिज हो गया है. इसके बाद अब बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय है.

Pintrest
Kuldeep Sharma

भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है. स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज कर दिया गया है. इसके साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए होने वाला मुकाबला भी खत्म हो गया है.

मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के बाद अब बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना बिल्कुल तय हो गया है. दरअसल बीजेपी ने नटराजन के नामांकन पर आपत्ति जताई थी. बीजेपी का आरोप था कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में एक पेंडिंग क्रिमिनल केस की जानकारी छुपाई है.

क्यों खारिज हुआ नामांकन?

जानकारी के अनुसार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह ने इस मामले को लेकर आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद चुनाव अधिकारी ने नटराजन को अपना पक्ष रखने के लिए मंगलवार शाम तक का समय दिया था. लेकिन उनका जवाब मिलने और उसकी समीक्षा करने के बाद अधिकारी ने उसे असंतोषजनक पाया और नामांकन रद्द कर दिया.


क्या था मामला पूरा मामला?

शिकायत के मुताबिक मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में चल रहे आपराधिक मामले का जिक्र अपने हलफनामे में नहीं किया था. यह मामला अगस्त 2025 में ए. श्रीलता नाम की महिला द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है. इस शिकायत में नटराजन समेत कई लोगों के नाम थे और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.

कोर्ट में पेंडिंग है केस

हैदराबाद की अदालत ने इस मामले में नटराजन को नोटिस जारी कर पेश होने को कहा था. हालांकि नटराजन ने अपने वकील के जरिए सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया था लेकिन अदालत ने इस मामले की सुनवाई जारी रखी और यह केस अभी भी अदालत में लंबित है. चुनाव अधिकारियों के अनुसार नामांकन पत्र में चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी न देना 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951' के नियमों का साफ उल्लंघन है. इसी वजह से उनका पर्चा रद्द किया गया.

बीजेपी को मिला सीधा फायदा

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना तय हुआ है. 230 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी के पास 164 विधायकों का भारी बहुमत है जिससे वह आसानी से दो सीटें जीत रही थी. तीसरी सीट को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा था जिस पर कांग्रेस मजबूत टक्कर देने की तैयारी में थी.

विधायकों की बाड़ेबंदी की योजना हुई फेल

क्रॉस-वोटिंग के डर से कांग्रेस अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने की पूरी तैयारी कर चुकी थी और इसके लिए एक चार्टर्ड प्लेन का इंतजाम भी कर लिया गया था. लेकिन नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट होते ही कांग्रेस ने यह प्लान रद्द कर दिया और विधायकों को वापस भोपाल लौटने के लिए कह दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने बीजेपी की राह बेहद आसान कर दी है और राज्य की तीनों राज्यसभा सीटों पर अब बीजेपी की जीत पूरी तरह तय हो गई है.