कारगिल की चोटियों पर बहा हमारे जवानों का लहू आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा: कारगिल विजय दिवस पर वाजपेयी का यादगार भाषण

अगस्त 1999 में, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कानपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने कारगिल युद्ध पर बात की और भारत की जीत को उन सैनिकों को समर्पित किया जिन्होंने इस युद्ध में अपनी जान गंवाई थी.

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Sagar Bhardwaj

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस को देश के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा था कि कारगिल की दुर्गम चोटियों पर बहा जवानों का रक्त आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी सरकार या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र और भारतीय सेना की विजय थी. उनके अनुसार भारतीय सैनिकों ने 15 से 17 हजार फीट की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और दुश्मन की मजबूत स्थिति के बावजूद तिरंगा फहराकर दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता और संकल्प का परिचय दिया.

वाजपेयी ने अपने संबोधन की शुरुआत उस राजनीतिक पृष्ठभूमि से की, जिसमें लोकसभा अपना कार्यकाल पूरा किए बिना भंग हो गई थी. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं मिला. राष्ट्रपति के आग्रह पर सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाई गई. उन्होंने कहा कि सरकार बनने के समय देश आर्थिक संकट और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, लेकिन अल्पकालिक कार्यकाल में आर्थिक माहौल को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए.

 परमाणु नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा

अपने भाषण में वाजपेयी ने भारत की परमाणु नीति का विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 1974 में हुए पहले परमाणु परीक्षण का उनकी पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए भी समर्थन किया था क्योंकि वह राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न था. उन्होंने तर्क दिया कि जब दुनिया की बड़ी शक्तियां लगातार परमाणु हथियारों का भंडार बढ़ा रही थीं और चीन भी परमाणु शक्ति बन चुका था, तब भारत के लिए आत्मरक्षा की क्षमता विकसित करना आवश्यक था.


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद पोखरण परमाणु परीक्षण कराने का निर्णय इसी सोच का परिणाम था. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आलोचना के बावजूद भारत अपने फैसले से पीछे नहीं हटा. उनका कहना था कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनना ही होगा और इसी दिशा में अग्नि मिसाइल जैसी रक्षा परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया.

कारगिल घुसपैठ पर सरकार का पक्ष रखा

वाजपेयी ने विपक्ष के उन आरोपों का जवाब भी दिया कि सरकार की लापरवाही के कारण कारगिल में घुसपैठ हुई. उन्होंने कहा कि इतनी लंबी सीमाओं पर हर इंच पर सैनिक तैनात करना संभव नहीं होता. घुसपैठ की कोशिशें पहले भी होती रही हैं और भविष्य में भी हो सकती हैं, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि भारतीय सेना ने किसी भी घुसपैठिए को स्थायी रूप से कब्जा जमाने नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि जैसे ही स्थिति स्पष्ट हुई, सेना ने निर्णायक कार्रवाई शुरू की और दुश्मन को भारतीय क्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया. उनके अनुसार सरकार ने समय पर आवश्यक सैन्य निर्णय लिए और इसी कारण ऑपरेशन सफल रहा.

वायुसेना के इस्तेमाल को निर्णायक फैसला बताया

वाजपेयी ने कहा कि कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना को शामिल करने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ. उन्होंने पूर्व के युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले एक अवसर पर वायुसेना का उपयोग नहीं किया गया था, जिससे सैनिकों की अधिक जान गई और भूमि का नुकसान भी हुआ. लेकिन कारगिल में परिस्थिति अलग थी और सरकार ने बिना हिचकिचाए वायुसेना को अभियान में शामिल किया.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि एक कार्यवाहक सरकार इतनी दृढ़ता से सैन्य कार्रवाई करेगी. उनके अनुसार यह संदेश गया कि सरकार भले ही लोकसभा में बहुमत खो चुकी हो, लेकिन उसने देश की जनता का विश्वास नहीं खोया था.

लाहौर बस यात्रा और पाकिस्तान पर विश्वासघात का आरोप

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी लाहौर बस यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच 50 वर्षों की कटुता कम करना था. उन्होंने कहा कि वे शांति और मित्रता का संदेश लेकर पाकिस्तान गए थे, युद्ध का नहीं. लेकिन लाहौर घोषणा के कुछ ही समय बाद कारगिल में घुसपैठ हुई, जिसे उन्होंने विश्वासघात बताया.

उन्होंने कहा कि जब विश्वास टूट जाता है तो वार्ता का वातावरण भी प्रभावित होता है. उनके अनुसार भविष्य में बातचीत तभी संभव है जब आतंकवाद और सीमा पार की हिंसक गतिविधियां बंद हों तथा भरोसे का माहौल दोबारा बने.

शहीदों के सम्मान और पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर टिप्पणी

वाजपेयी ने कहा कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ उनके परिवारों तक पहुंचाए गए. उन्होंने इसे भारतीय सैन्य परंपरा और राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक बताया. उन्होंने उन माताओं के साहस का उल्लेख किया जिन्होंने अपने बेटों की शहादत पर गर्व व्यक्त किया.

इसके विपरीत उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अपने सैनिकों के शव लेने से भी इनकार कर दिया क्योंकि वह दुनिया के सामने यह दावा कर रहा था कि लड़ाई पाकिस्तानी सेना नहीं बल्कि तथाकथित मुजाहिदीन लड़ रहे थे. वाजपेयी के अनुसार बाद में यह दावा झूठ साबित हुआ और पाकिस्तान को स्वीकार करना पड़ा कि उसकी नियमित सेना कारगिल संघर्ष में शामिल थी.

युद्ध में भी मानवीय मूल्यों पर जोर

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने युद्ध के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवीय मूल्यों का पालन किया. भारतीय सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार और अंग-भंग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारत ने पकड़े गए सैनिकों और मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया. उनके अनुसार युद्ध की भी अपनी मर्यादा होती है और भारत ने हमेशा उसका पालन किया है.

कश्मीर, आतंकवाद और राष्ट्रीय एकता पर स्पष्ट संदेश

वाजपेयी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि हथियारों के बल पर उसकी स्थिति नहीं बदली जा सकती. उन्होंने पाकिस्तान पर शिमला समझौते और लाहौर घोषणा की भावना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पार से आतंकवाद, आईएसआई की गतिविधियां और घुसपैठ किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती.

उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध ने भारत की विविधता में एकता को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया. अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और धर्मों के सैनिक एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े और देश की रक्षा की. यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है.

चुनाव में स्थिर सरकार की अपील

भाषण के अंतिम हिस्से में वाजपेयी ने आर्थिक सुधारों, महंगाई पर नियंत्रण, कृषि उत्पादन बढ़ाने और रोजगार सृजन के लक्ष्य का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल 13 महीनों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया है, लेकिन कई काम अभी अधूरे हैं.

उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे आगामी चुनाव में स्पष्ट जनादेश दें ताकि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और अधूरे विकास कार्यों को आगे बढ़ा सके. उनके अनुसार स्थिर सरकार ही देश को दीर्घकालिक दिशा और मजबूती प्रदान कर सकती है.