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BJP News President In MP: हेमंत खंडेलवाल बने मध्य प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष, जानें कैसे शुरु हुई उनकी राजनीतिक यात्रा

हेमंत खंडेलवाल को निर्विरोध रूप से मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया है. वे पूर्व सांसद हैं और पार्टी के लिए लंबे समय से संगठनात्मक काम में सक्रिय हैं. उनकी नियुक्ति खासकर आगामी चुनावों की दृष्टि से पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
BJP News President In MP: हेमंत खंडेलवाल बने मध्य प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष, जानें कैसे शुरु हुई उनकी राजनीतिक यात्रा
Courtesy: Social Media

BJP News President In MP: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. भाजपा ने हेमंत खंडेलवाल को राज्य इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खास बात यह है कि खंडेलवाल को यह जिम्मेदारी निर्विरोध रूप से सौंपी गई है, यानी उनके खिलाफ किसी ने नामांकन तक दाखिल नहीं किया. उनके नाम का औपचारिक ऐलान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया.

कौन हैं हेमंत खंडेलवाल: हेमंत खंडेलवाल एक वरिष्ठ और अनुभवी भाजपा नेता हैं. वे पूर्व लोकसभा सांसद रहे हैं और पार्टी में संगठनात्मक कामकाज से गहरी समझ रखते हैं. उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल भी एक प्रतिष्ठित भाजपा सांसद रहे हैं, यानी राजनीति उनके परिवार में रची-बसी है. हेमंत खंडेलवाल खुद भी खंडवा से सांसद रह चुके हैं और उन्होंने लंबे समय तक सामाजिक सेवा और संगठनात्मक काम में सक्रिय भूमिका निभाई है.

क्यों बनी उनकी नियुक्ति अहम?

हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति को मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. वर्तमान समय में पार्टी को आंतरिक संतुलन, नई पीढ़ी के नेतृत्व और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ की जरूरत है. खंडेलवाल इन सभी जरूरतों पर खरे उतरते हैं. वे न केवल कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं, बल्कि संगठनात्मक दृष्टिकोण से भी काफी सक्रिय रहे हैं.

पार्टी नेतृत्व की ओर से समर्थन

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने खंडेलवाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनके चुनाव की घोषणा करते हुए कहा कि, “हेमंत खंडेलवाल पार्टी को प्रदेश में नई ऊर्जा देंगे और संगठन को मजबूत बनाएंगे.”

आगामी चुनौतियां

हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव और भविष्य में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां जोरों पर हैं. ऐसे में उनका काम आसान नहीं होगा. उन्हें संगठन को एकजुट रखते हुए कार्यकर्ताओं में जोश बनाए रखना होगा.