छात्रों के लिए कर्नाटक सरकार ने रखा 'डिजिटल डिटॉक्स' का प्रस्ताव, बच्चों का स्क्रीन टाइम होगा लिमिटेड
कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए डिजिटल डिटॉक्स नीति का प्रस्ताव रखा है, जिसमें स्क्रीन टाइम सीमित करने, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने पर जोर दिया गया है.
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने एक ड्राफ्ट पॉलिसी का प्रस्ताव रखा है, जिसका मकसद छात्रों में जिम्मेदार डिजिटल इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. यह कदम ज्यादा स्क्रीन टाइम से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है. यह पॉलिसी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों पर केंद्रित है. जिसमें डिजिटल वेल-बीइंग, भावनात्मक स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी के संतुलित इस्तेमाल पर खास जोर दिया गया है.
प्रस्तावित उपायों के तहत पॉलिसी में डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की गई है. इसमें छात्रों के लिए मनोरंजन से जुड़े स्क्रीन टाइम को रोज़ाना एक घंटे तक सीमित करने और स्कूल-स्तर पर डिजिटल इस्तेमाल से जुड़ी नीतियां बनाना अनिवार्य करने का भी सुझाव दिया गया है.
स्कूलों को क्या दिया गया निर्देश?
पॉलिसी को लागू करने के लिए स्कूलों को 'डिजिटल वेलनेस कमेटियां' बनानी होंगी. ये कमेटियां छात्रों में टेक्नोलॉजी की लत के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें काउंसलिंग सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार होंगी.
पॉलिसी में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका पर भी जोर दिया गया है. शिक्षकों को डिजिटल के ज्यादा इस्तेमाल से जुड़े मामलों की पहचान करने और उन्हें संभालने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी, जबकि अभिभावकों को एक व्यवस्थित दिनचर्या बनाने स्क्रीन टाइम की सीमाएं लागू करने और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा.
क्या है टेक-फ्री पीरियड?
इसके अलावा ड्राफ्ट पॉलिसी में छात्रों के लिए 'टेक-फ्री पीरियड' यानी बिना टेक्नोलॉजी वाले समय शुरू करने और बाहरी गतिविधियों को बढ़ाने को बढ़ावा दिया गया है. इसमें साइबर जोखिमों, जैसे कि बुलीइंग और ऑनलाइन शोषण के बारे में ज्यादा जागरूकता फैलाने की भी बात कही गई है.
निगरानी को मजबूत करने के लिए पॉलिसी में मॉनिटरिंग सिस्टम, रिपोर्टिंग तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों व साइबर अपराध अधिकारियों के साथ सहयोग करने का प्रस्ताव है.
इस पहल का मकसद स्कूलों, परिवारों और सरकार के मिले-जुले प्रयासों से छात्रों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित डिजिटल माहौल तैयार करना है.
सीएम सिद्धारमैया ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को बताया कि हाल ही में कर्नाटक ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य का वार्षिक बजट पेश करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर यह प्रतिबंध बच्चों पर मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बुरे प्रभावों को रोकने के मकसद से लगाया गया है.
इस कदम के साथ ही कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने बच्चों के बीच सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने के विषय पर सबसे ठोस घोषणा की है.
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