नई दिल्ली: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से जारी सुगबुगाहट अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. राज्य के लगभग 30 वरिष्ठ कांग्रेसी विधायकों ने एक साथ नई दिल्ली का रुख किया है, जहां उनका मुख्य उद्देश्य पार्टी आलाकमान से मिलकर कैबिनेट में फेरबदल के लिए दबाव बनाना है. हाल के उपचुनावों के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग ने जोर पकड़ लिया है. ये विधायक सामूहिक रूप से अपनी बात राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने रखेंगे.
मंत्रिमंडल में जगह पाने की इस कवायद की नींव मार्च में ही एक रणनीतिक बैठक के दौरान रख दी गई थी. तब इन विधायकों ने एक विशेष 'डिनर मीटिंग' आयोजित की थी, जहां अपनी मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई थी. उपचुनावों के नतीजों के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग और तेज हुई, जिसने इन विधायकों को एकजुट होकर दिल्ली कूच करने के लिए प्रेरित किया. सोमवार को होने वाली इस बैठक को लेकर विधायकों के बीच काफी उम्मीदें देखी जा रही हैं.
कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने दिल्ली प्रस्थान से पहले अपनी मंशा साफ कर दी. उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसे कई वरिष्ठ नेता हैं जिन्हें तीन, चार या पांच बार मंत्री बनने का अवसर मिला है. उनका तर्क है कि अब समय आ गया है जब उन नेताओं को मौका दिया जाए जो अब तक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो पाए हैं. गोपालकृष्ण के अनुसार, यह दौरा केवल और केवल मंत्री पदों को सुरक्षित करने और नेतृत्व को अपनी बात पहुंचाने के लिए है.
एक अन्य वरिष्ठ विधायक अशोक पट्टन ने इस प्रयास को सामूहिक नेतृत्व की दिशा में एक कदम बताया. पट्टन ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस पुराने आश्वासन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो साल बाद अन्य सदस्यों को भी कैबिनेट में शामिल किया जाएगा. पट्टन के मुताबिक, सरकार को बने लगभग तीन साल होने को आए हैं, लेकिन विधानसभा सत्रों और चुनावों के कारण यह प्रक्रिया टलती रही. अब विधायक अपनी उपेक्षा को लेकर आलाकमान से शिकायत करने की तैयारी में हैं.
विधायकों का यह समूह एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ-साथ के.सी. वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला और राहुल गांधी से मिलने का प्रयास करेगा. उनकी उपलब्धता के आधार पर विधायक अपना पक्ष रखेंगे. अशोक पट्टन ने कहा कि उनकी मांगों में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और अंतिम निर्णय आलाकमान को ही लेना है. यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जहां विधायक अपनी आकांक्षाओं को पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने रख रहे हैं ताकि राज्य प्रशासन में नई ऊर्जा आ सके.
सूत्रों की मानें तो विधायक चाहते हैं कि कैबिनेट के व्यापक पुनर्गठन के माध्यम से करीब 25 पद खाली किए जाएं ताकि नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सके. उनका तर्क है कि कई नेता बार-बार मंत्री पद पर बने हुए हैं, जिससे नए नेतृत्व के लिए कोई जगह नहीं बचती. फिलहाल, इन विधायकों का एकमात्र एजेंडा कैबिनेट विस्तार है. वे आलाकमान को यह समझाने की कोशिश करेंगे कि सरकार की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए यह फेरबदल राज्य हित में अत्यंत आवश्यक है.