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भुगतान नहीं तो काम नहीं... कर्नाटक में ठेकेदारों की हड़ताल से ठप हुआ निर्माण कार्य

कर्नाटक में 6 मार्च को कॉन्ट्रैक्टर्स ने राज्यभर में हड़ताल कर दी है. उनका आरोप है कि सरकार ने 37 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाया भुगतान नहीं किए. इस कारण निर्माण क्षेत्र में बड़ा कामकाज ठप हो गया.

ANI
Babli Rautela

कर्नाटक में 6 मार्च को निर्माण क्षेत्र से जुड़ी बड़ी हड़ताल देखने को मिली. कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने पूरे राज्य में काम बंद करने का ऐलान किया. इस हड़ताल के कारण कई सरकारी प्रोजेक्ट्स का काम रुक गया. कॉन्ट्रैक्टर्स का आरोप है कि सरकार छोटे और मीडियम ठेकेदारों के लंबे समय से लंबित भुगतान करने में नाकाम रही है. इससे निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है. एसोसिएशन का कहना है कि कई बार अपील करने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा.

कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार राज्य के कई सरकारी विभागों में बड़ी रकम का भुगतान अटका हुआ है. एसोसिएशन का दावा है कि पब्लिक वर्क्स विभाग, वॉटर रिसोर्स विभाग, ग्रेटर बैंगलोर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और बैंगलोर वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड में कुल मिलाकर करीब 37 हजार 370 करोड़ रुपये के बिल पेंडिंग हैं. कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स का कहना है कि उनके भुगतान तीन साल से भी ज्यादा समय से अटके हुए हैं. इस वजह से उन्हें बैंक से कर्ज लेना पड़ा और कई लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है.

सिक्योरिटी डिपॉजिट भी नहीं मिला

कॉन्ट्रैक्टर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि पुराने प्रोजेक्ट्स के सिक्योरिटी डिपॉजिट भी वापस नहीं किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि कई प्रोजेक्ट्स पांच साल पहले पूरे हो चुके हैं लेकिन उनका पैसा अभी तक रोका हुआ है. ग्रेटर बैंगलोर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कुछ भुगतान जारी होने के बावजूद अभी भी करीब 1600 से 2600 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है.

एसोसिएशन की मुख्य मांगें

कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर मंजूनाथ ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं. उन्होंने कहा कि सभी लंबित भुगतान एक साथ जारी किए जाएं ताकि कॉन्ट्रैक्टर्स को राहत मिल सके. इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ एक आधिकारिक बैठक की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सरकार और कॉन्ट्रैक्टर्स के बीच बातचीत होती है तो करीब 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान निकल सकता है. एसोसिएशन ने पैकेज टेंडर व्यवस्था को खत्म करने की भी मांग की है. उनका आरोप है कि इससे भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव बढ़ता है.

भ्रष्टाचार के आरोप और विवाद

कॉन्ट्रैक्टर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ विधायक अपने रिश्तेदारों के माध्यम से प्रोजेक्ट्स करवाते हैं. इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं. एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कमीशन का दबाव पहले से ज्यादा बढ़ गया है. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों को सौ से ज्यादा पत्र भेजे गए लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला.