सैलरी 2006 की, किराया 2046 का! बेंगलुरु में बढ़ते किराए पर छिड़ी बहस

Bengaluru Rent Crisis: बेंग्लुरू में किराया कितना ज्यादा है, ये तो आप सभी जानते हैं. इस पर सोशल मीडिया पर काफी बहस चल रही है. चलिए जानते हैं क्या है लोगों का कहना.

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Shilpa Srivastava

Bengaluru Rent Crisis: हम जितना कमाते हैं, उससे कहीं ज्यादा किराया देने में खर्च कर देते हैं. वैसे तो ये परेशानी आप अपने शहर में झेल ही रहे होंगे, लेकिन एक और ऐसा शहर है जिसमें ये परेशानी नंबर वन पर आती है. बेंगलुरु को देश का बड़ा IT हब माना जाता है. यहां देश-दुनिया की कई बड़ी कंपनियां हैं और हर साल हजारों लोग नौकरी के लिए पहुंचते हैं. लेकिन अब शहर में रहने की बढ़ती लागत खासकर महंगे किराये को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है.

इस मुद्दे पर हमने कई बार ऑनलाइन लोगों को बहस करते हुए सुना है. अब फिर से रेडिट पर एक यूजर ने बेंगलुरु के किराये को लेकर अपनी परेशानी साझा की. उसने मजाकिया अंदाज में लिखा कि “सैलरी 2006 में अटकी हुई है, लेकिन बेंगलुरु का किराया 2046 में पहुंच गया है.” यूजर ने न्यू थिप्पासांद्रा और इंदिरानगर जैसे इलाकों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से किराए बढ़ रहे हैं, उस रफ्तार से सैलरी नहीं. 

आखिर कितना है 1BHK का किराया:

पोस्ट में बताया गया है कि 1BHK का रेंट 22,000 रुपये से 24,000 रुपये प्रति महीने तक है. सिर्फ यही नहीं, इसके लिए करीब 1.5 रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट भी मांगा जाता है. इन सब में सबसे अहम बात कि ये घर 15 से ज्यादा पुराना था और दूसरी मंजिल पर था. इस फ्लैट में कोई सुविधा भी नहीं थी. पानी की सप्लाई भी सीमित समय के लिए मिलने की बात कही गई.


इसके अलावा यूजर ने इसे एक तरह की फाइनेँशियल टाइम मशीन बताया. उसके मुताबिक कंपनियां कर्मचारियों को सैलरी कम देती हैं, लेकिन मकान मालिक किराया 2046 के हिसाब से मांगते हैं. 

1BHK और 1RK की परिभाषा पर भी सवाल:

इनके अलावा एक और बात पर चर्चा चल रही है. यहां पर 1BHK और 1RK का कॉन्सेप्ट है. कुछ लोगों का कहना है कि बेंगलुरु में मकान मालिक और ब्रोकर कई बार 1BHK और 1RK की अलग-अलग परिभाषा बताते हैं. कुछ मामलों में छोटे से ग्रेनाइट स्लैब या कमरे के एक कोने में दी गई जगह को भी किचन बता दिया जाता है और इसे 1BHK के तौर पर पेश किया जाता है. यूजर्स ने इसकी भी शिकायत की है. वहीं, पेंटिंग के नाम पर अतिरिक्त पैसा लेने की बात भी सामने आई.

क्या किराये पर कंट्रोल जरूरी?

अब सवाल यह उठता है कि क्या इस सैच्यूरेटेड रेंट को कंट्रोल किया जाएगा या नहीं. बढ़ते किराये के बीच कुछ लोगों ने कहा है कि शहर में रेंट कंट्रोल या बेहतर निगरानी की जरूरत है. उनका कहना है कि अगर किराये लगातार बढ़ते रहे तो कर्मचारी और कंपनियां बेंगलुरु के बजाय दूसरे शहरों का रुख कर सकती हैं.

वहीं, एक यूजर ने यह भी सुझाव दिया कि बेंगलुरु में जॉब ऑफर लेते समय लोगों को मिनिमम 20% हाईक इन हैंड पर मांगना चाहिए. हालांकि, इससे ज्यादा हो, तो ही सही रहेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां रहने का खर्च काफी अधिक है. कुछ लोगों ने टियर-2 शहरों से काम करने को भी विकल्प बताया. नागपुर, भुवनेश्वर और कोयंबटूर जैसे शहरों में कंपनियों के विस्तार को भी इसी बदलती स्थिति से जोड़कर देखा गया.

ज्यादा किराया और EMI से रहें सावधान:

लोग ज्यादा रेंट से तो परेशान हैं ही, साथ ही EMI से भी परेशान हैं. लोग कई बार अपनी सैलरी से कहीं ज्यादा का लोन ले लेते हैं और फिर उसकी EMI देते रहते हैं. बहुत ज्यादा किराया या होम लोन EMI लेने आपको बचना चाहिए. नौकरी जाने जैसी स्थिति में भारी किराया या EMI परिवार के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है. बेंगलुरु की यह बहस दिखाती है कि तेजी से बढ़ती हाउसिंग कॉस्ट और सैलरी के बीच का अंतर अब IT कर्मचारियों के लिए गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है.