नई दिल्ली: क्या आपने द बिग बैंग थ्योरी देखी है? अगर हां, तो उसमें शेल्डन कूपन याद है? शेल्डन अपने दोस्तों का पूरा हिसाब रखता था और तीन स्ट्राइक नियम पर चलता था. वह उन लोगों की लिस्ट बनाता था जिन्हें वह पसंद नहीं करता है. यह एक अजीब कैरेक्टर था. यह तो केवल एक फिक्शन कैरेक्ट है, लेकिन एक ऐसा व्यक्ति रियल लाइफ में भी है. बेंगलुरू में पंकज नाम के एक आदमी की कहानी कुछ ऐसी ही है.
पंकज ने अपने एक्स प्लेटफॉर्म पर एक कहानी शेयर की. उसने जिया नाम का एक पर्सनल सिस्टम बनाया है. यह सभी लोगों के लिए एक प्राइवेट ऐप या ट्रैकर है. यह ट्रैकर लोगों के साथ हर बातचीत रिकॉर्ड करता है. इसमें आप किसी से कितनी बार बात करते हैं, उनसे मिलने के बाद उसे कैसा लगता है और हर दोस्ती के लिए रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) को कैलकुलेट करता है.
— Pankaj (@the2ndfloorguy) February 16, 2026Also Read
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आसान भाषा में समझें तो यह मेजर करता है कि किसी के साथ समय बिताने से उसे खुशी, सपोर्ट या वैल्यू मिलती है या नहीं. कई लोगों ने उसके तरीके को ठंडा, रोबोट जैसा या डरावना भी कहा. उन्होंने कहा कि वह इंसानों के साथ बिजनेस डील जैसा बर्ताव कर रहा था. लेकिन पंकज ने इन सभी की बातों को दरकिनार करते हुए कहा कि सभी के पास समय कम है और वो हमेशा नहीं जी सकते हैं. इसलिए वह अपने समय का समझदारी से इस्तेमाल करना चाहता है.
छह सालों तक रिश्तों को ट्रैक करने के बाद, उन्होंने अपने डाटा से असली नंबर शेयर किए. उन्होंने कहा कि सिर्फ हाय-हेलो से असली बातचीत तक जाने में करीब 8 से 12 घंटे का समय लगता है. थोड़ा बहुत भरोसा जीतने के लिए 3 से 6 महीनों में 45 से 60 घंटे बिताने पड़ते हैं. अगर दोस्ती गहरी चाहिए तो 1 से 2 साल में 80 से 120 घंटे लगते हैं, जिसमें लोग अपनी असली फीलिंग्स और सीक्रेट्स शेयर कर सकते हैँ.
इसका सीधा मतलब है कि कोई भी नया और करीबी रिश्ता शुरू करने में करीब 130 से 190 घंटे का समय और एनर्जी लगती है. उसके बाद हर साल, वह सिर्फ रेगुलर टच में रहने के लिए 30 से 40 घंटे बिताते हैं. इसके साथ ही बर्थडे, प्रॉब्लम या लाइफ अपडेट के लिए एक्स्ट्रा समय निकालते हैं.
A very weird way to look at life if you calculate time taken to talk with anyone on an ROI basis - only talk to people if it's mutually fun for both, and if it's that, you shouldn't expect any more "roi" from that..
— Akshay Akash (@UnlabelledGenZ) February 16, 2026
Conversations are not a means to an end imo
पिछले 6 सालों में, पंकज ने अलग-अलग दोस्तों के साथ 354 घंटे बिताए. लेकिन उसे एहसास हुआ कि सिर्फ छह लोग ही उन्हें सच में गहराई से जानते और समझते हैं. उसे लगता है कि उन्होंने कई कनेक्शन पर समय बर्बाद किया. उनका कहना है कि इंसानों के पास गहरे रिश्तों के लिए लिमिटेड जगह होती है. वह केवल 5 से 8 बहुत करीबी दोस्त और शायद 10 से 12 अच्छे दोस्त ही संभाल सकता है.
पंकज ने बताया कि अभी उसके सिर्फ चार दोस्त हैं, जिन्हें वह 8 से 12 साल से जानता है. वह उनके साथ साल में लगभग 400 घंटे बिताता है. ये वही घंटे हैं जो उसे सही में सहारा और खुशी देते हैं. अगर वह इतने ही समय में 6 या 8 नए दोस्त बनाने की कोशिश करे, तो वे नए रिश्ते कमजोर ही रहेंगे.
अगर आप 25 साल की उम्र के बाद किसी नए इंसान से मिलते हैं, तो पुराने दोस्तों जैसी इक्यूशन पाने में कई साल लग जाते हैं. 72–73% चांस है कि नया रिश्ता दो साल के अंदर फीका पड़ जाएगा या टूट जाएगा. इस वजह से, उसने अपनी फ्रेंड लिस्ट लगभग बंद कर दी है. वह ज्यादातर लोगों को न कह देता है. इसके बजाय, वह अपने अभी के करीबी दोस्तों, अपनी हेल्थ, स्किल्स और काम पर फोकस करता है.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. एक व्यक्ति ने पूछा, “क्या आप सच में एक दिन उठते हैं और किसी से बात करना बंद करने का फैसला करते हैं?” एक अन्य व्यक्ति ने कहा यह पढ़कर दुख हुआ. हालांकि, इसकी थॉट प्रोसेस से कुछ लोग सहमत भी थे. उनका कहना था कि नंबर थोड़े मुश्किल है, लेकिन सच हैं.