झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को बड़ा ऐलान किया. सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी है. इसके साथ ही TDPL के माध्यम से कराई गई सभी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी भर्ती प्रक्रिया को भी निरस्त करने का निर्णय लिया गया है. यह फैसला लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों के बीच आया है.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं के प्रकाशित परिणाम भी अब मान्य नहीं रहेंगे. कंपनी के माध्यम से हुई परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाएगा. सरकार का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. इससे प्रभावित अभ्यर्थियों के सामने अब नई भर्ती प्रक्रिया की संभावना महत्वपूर्ण होगी.
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: JPSC-JSSC aspirants get emotional as they celebrate after the state government accepted their demands. The JSSC CGL exam and all exams conducted on behalf of TDPL have been cancelled. pic.twitter.com/u34jcsShxA
— ANI (@ANI) August 17, 2026
हेमंत सोरेन ने बताया कि वर्ष 2014 से TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं की जांच कराई जाएगी. इस जांच में CID और SIT की भूमिका होगी. मुख्यमंत्री के मुताबिक पहले की जांच में परीक्षा संबंधी मामलों में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्हें गंभीरता से देखने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि कथित परीक्षा धांधली के मामलों में JSSC से जुड़े कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है.
#WATCH | Ranchi: Jharkhand CM Hemant Soren says, "Today, the Cabinet decided to cancel the JSSC-CGL examinations as well. Furthermore, a comprehensive inquiry will be conducted into all errors—minor or major—that have occurred since 2014. We will also soon convene to discuss the… pic.twitter.com/9jnEdbUaHx
— ANI (@ANI) August 17, 2026
सरकार का यह फैसला करीब 24 दिनों से चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच आया है. सोरेन ने कहा कि मंत्री समूह ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान निकालने का प्रयास किया. सरकार ने छात्रों की कई मांगों को पहले ही स्वीकार करने की बात कही है. हालांकि बातचीत का पिछला दौर किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंच पाया था.
मुख्यमंत्री ने परीक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि परीक्षाएं कराने के लिए सरकार के पास पहले से मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP मौजूद है, लेकिन उसका उचित तरीके से पालन नहीं हुआ. इसी वजह से हाल की परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं. सरकार अब परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सुधार लागू करने की तैयारी कर रही है.
सरकार ने अनियमितताओं की अलग से जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का भी फैसला किया है. इसके अलावा छात्रों की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है. यहां प्राप्त शिकायतों को विशेषज्ञ टीम के सामने रखा जाएगा. अमिताभ कौशल को सरकार की परीक्षा सुधार पहल का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के हित में पेपर लीक के खिलाफ कानून पहले ही लागू कर चुकी है और आगे भी सुधार जारी रखे जाएंगे. अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों पर नजर रहेगी. सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा बहाल करना और भविष्य की परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से आयोजित करना होगी.