यमुनानगर: यमुनानगर के गंदापुरा गांव में एक गुमनाम दानवीर ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है. इस व्यक्ति ने महज 30 दिनों में राजकीय माध्यमिक स्कूल की सूरत बदल दी. खास बात यह है कि मदद करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सार्वजनिक करने से साफ इनकार कर दिया.
जुलाई में जब यह व्यक्ति स्कूल पहुंचा तो उसने स्कूल इंचार्ज से मुलाकात की. स्कूल की स्थिति और बच्चों की जरूरतों को देखकर उसने मदद करने की इच्छा जताई. उसने केवल इतना आग्रह किया कि उसके नाम का प्रचार न किया जाए.
दानवीर ने सबसे पहले स्कूल में बच्चों के बैठने की समस्या दूर की. करीब एक सप्ताह के अंदर स्कूल में 30 ड्यूल डेस्क रखवा दिए गए. इससे बच्चों के लिए बैठने की बेहतर व्यवस्था हो गई.
इसके बाद उसकी नजर स्कूल के मैदान पर गई. बच्चों के लिए मैदान में पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं. दानवीर ने महज चार दिनों के भीतर स्कूल में नए झूले लगवा दिए. इससे बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ मनोरंजन की सुविधा भी बेहतर हो गई.
स्कूल में कुछ बच्चे मैले कपड़ों या बिना वर्दी के आते दिखाई दिए. दानवीर को लगा कि इसके पीछे आर्थिक परेशानी हो सकती है. इसके बाद अगले ही सप्ताह उसने स्कूल के सभी 50 छात्र-छात्राओं के लिए वर्दी, जूते, जुराबें और स्कूल बैग उपलब्ध करा दिए.
इस मदद से उन बच्चों को बड़ी राहत मिली, जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल का जरूरी सामान नहीं खरीद पा रहे थे. बच्चों के चेहरे पर आई खुशी इस मदद की सबसे बड़ी पहचान बनी.
स्कूल की अन्य समस्याओं पर भी दानवीर की नजर गई. भवन की दीवारों पर सीलन और दरारें थीं. इसके बाद उसने स्कूल भवन में मरम्मत का काम करवाया और पूरे भवन में पेंट भी कराया.
महज एक महीने में स्कूल में डेस्क, झूले, बच्चों की वर्दी, जूते, जुराबें और बैग से लेकर भवन की मरम्मत और रंग-रोगन तक का काम हो गया. जुलाई और अगस्त की तस्वीरें स्कूल में आए इस बदलाव को साफ दिखाती हैं.
डिप्टी डीईओ केएस संधावा ने इस पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समाज के लोगों का आगे आना बेहद सराहनीय है. गंदापुरा के व्यक्ति ने बिना प्रचार की इच्छा के बच्चों और स्कूल की जरूरतें पूरी कीं. ऐसी पहल से स्कूल का वातावरण बेहतर होता है और दूसरे लोग भी सरकारी स्कूलों की मदद के लिए प्रेरित होते हैं.