गुरुग्राम में मानसून की बारिश के बाद जलभराव ने एक बार फिर शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार को पानी से भरी सड़कों पर स्कूल बसों के फंसने के बाद जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई निर्देश जारी किए. स्कूलों से जलभराव वाले रास्तों से बसें नहीं भेजने और सुरक्षित विकल्प तलाशने को कहा गया है. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन से जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे हैं.
गुरुग्राम प्रशासन ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि पानी से भरे रास्तों पर स्कूल बसें न चलाएं. जहां संभव हो, सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जाए. अगर कोई सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं है, तो बच्चों को स्कूल परिसर में कर्मचारियों की निगरानी में रखा जाएगा और अभिभावकों को सूचना दी जाएगी. बच्चों को केवल माता-पिता या अधिकृत व्यक्ति के हवाले करने का निर्देश भी दिया गया है.
#Order
— DIPRO Gurugram (@diprogurugram1) August 25, 2026
🌧️ बारिश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं डीसी श्री उत्तम सिंह ने जारी किए आदेश, जलभराव वाले रास्तों पर स्कूल बसें नहीं चलेंगी
➡️ गुरुग्राम में मानसून के दौरान स्कूल बसों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जिला… pic.twitter.com/hkuSuhyaVr
प्रशासन ने प्रत्येक स्कूल बस में कर्मचारी एस्कॉर्ट और पर्याप्त पेयजल रखने को कहा है. ड्राइवरों को जलभराव वाले रास्तों और अंडरपास से बचने की स्पष्ट हिदायत दी गई है. बस के मार्ग या समय में बदलाव होने पर स्कूलों को पहले से SMS या स्कूल ऐप के जरिए अभिभावकों को जानकारी देनी होगी. बिना निगरानी वाले या पानी से घिरे बस स्टॉप पर बच्चों को उतारने पर भी रोक रहेगी.
बारिश और मौसम चेतावनी के दौरान गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस को स्कूल बस मार्गों पर जलभराव की जानकारी साझा करने की व्यवस्था बनाने को कहा गया है. सुबह 5:30 बजे, 10:30 बजे और दोपहर 12:30 बजे स्थिति की रिपोर्ट जारी की जाएगी. अचानक भारी बारिश या रास्ता बंद होने पर 30 मिनट के भीतर सूचना देने का निर्देश है. संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मी, टोइंग वाहन और पुलिस वाहन भी तैनात किए जाएंगे.
प्रशासन ने हरियाणा रोडवेज की अतिरिक्त बसें भी तैयार रखने को कहा है. इन्हें तय स्थानों पर रखा जाएगा, ताकि स्कूल बस फंसने या खराब होने की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके. हर स्कूल में परिवहन प्रभारी या मार्ग सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है. बारिश के दौरान बच्चों को बेसमेंट या परिसर के निचले हिस्सों में जमा नहीं करने को भी कहा गया है.
प्रशासन के निर्देशों के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नाराजगी जताई. नागरिकों का कहना है कि बसों को पानी वाली सड़कों से हटाना तत्काल सुरक्षा उपाय हो सकता है, लेकिन इससे जल निकासी की मूल समस्या हल नहीं होती. लोगों ने नालों की सफाई, बेहतर ड्रेनेज और सड़क व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग की. कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए कहा कि बारिश, गर्मी और सर्दी, हर मौसम में घर पर रहने की सलाह ही मिल रही है.
We won't make motorable roads.
— R-T (@UdtaPilot) August 25, 2026
Won't clear debris.
Won't de-slit drains.
Won't make infrastructure to ensure drainage.
Won't have officials accountable.
But would take out an impractical order making schools n parents responsible for Govt machinery's Incompetency. Joke's on us.
This is the Haryana government’s answer to Gurugram’s waterlogging crisis.
— vedika sud (@vedikas) August 25, 2026
Don’t send school buses on waterlogged roads!
Use alternative routes.
If there is no safe alternative, keep children in school and inform parents.
But here’s the question the government needs to answer:… https://t.co/yFtsCFrI6x