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खट्टर के लिए छोड़ी थी अपनी जीती हुई सीट, हरियाणा से राज्यसभा जाएंगे पीएम मोदी के खास; जानिए कौन हैं भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया?

भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है. पार्टी ने यह करके साफ संदेश भेजा है कि संगठन के प्रति निष्ठा और धैर्य का ईनाम जरूर मिलता है.

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Ashutosh Rai

हरियाणा राज्यसभा चुनावः भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने रणनीतिक पत्ते खोल दिए हैं. पार्टी ने पानीपत के मॉडल टाउन निवासी और करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है. राजनीतिक नजरिए से यह एक बेहद दिलचस्प कदम है. ऐसे इसलिए क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काटकर उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मैदान में उतारा था. टिकट कटने के बावजूद शांत रहने वाले भाटिया को अब उच्च सदन में भेजकर पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन के प्रति निष्ठा और धैर्य का ईनाम जरूर मिलता है.

पीएम के बेहद करीबी

58 वर्षीय संजय भाटिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद करीबी माना जाता है. उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने करनाल सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों के विशाल अंतर से हराया था. यह न केवल उनके राजनीतिक करियर की बल्कि हरियाणा के 53 साल के इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी. लोकसभा टिकट कटने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के रास्ते वापस संसद पहुंचाने का फैसला किया है.

दशकों के सफर का मिला ईनाम

संजय भाटिया का सफर रातों-रात मिली सफलता का नहीं, बल्कि दशकों के जमीनी संघर्ष का परिणाम है. 29 जुलाई 1967 को जन्मे भाटिया ने पानीपत के आईबी कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री हासिल की और कॉलेज के दिनों से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए थे. 1987 में मंडल सचिव के पद से शुरुआत करके वे 1989 में ABVP के जिला महासचिव और 1998 में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव बने. 2015 से 2021 तक उन्होंने हरियाणा भाजपा के प्रदेश महासचिव के रूप में काम किय. साथ ही राज्य के कई बोर्डों के अध्यक्ष का पद भी संभाला.

भाजपा की रणनीति

हरियाणा में 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान होना है. राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा के गणित पर नजर डालें तो भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 37 और इनेलो के पास 3 विधायक हैं. इस संख्या बल के आधार पर संजय भाटिया की एक सीट पर जीत पूरी तरह से पक्की मानी जा रही है. वहीं दूसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबला है, लेकिन वहां कांग्रेस की जीत लगभग तय है. राजनीतिक समीकरण बताते हैं कि अगर भाजपा इनेलो से हाथ मिला भी ले, तो भी दूसरी सीट पर जीतना नामुमकिन है. 

कांग्रेस के कई विधायकों को तोड़ना होगा

दूसरी सीट हासिल करने के लिए भाजपा को कांग्रेस के कई विधायकों को तोड़ना होगा, जो वर्तमान राजनीतिक हालात में असंभव सा लग रहा है. कुल मिलाकर, संजय भाटिया का नामांकन केवल एक पद की भरपाई नहीं है, बल्कि यह हरियाणा में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और वफादारी को पुरस्कृत करने की भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.