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34 साल में 57 बार ट्रांसफर, 2012 में रॉबर्ट वाड्रा मामले ने किया था चर्चित; कौन हैं IAS अशोक खेमका?

आईएएस खेमका का औसतन हर छह महीने में तबादला हुआ है. पिछले 12 वर्षों में उन्हें कम महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ किया गया है, जो उनके करियर में एक बड़ा बदलाव है.

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Edited By: Anvi Shukla
34 साल में 57 बार ट्रांसफर, 2012 में रॉबर्ट वाड्रा मामले ने किया था चर्चित; कौन हैं IAS अशोक खेमका?
Courtesy: social media

IAS Ashok Khemka: 30 अप्रैल 2025 को हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका अपने 34 साल के शानदार करियर के बाद परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इस दौरान उन्होंने 57 बार पदस्थापना का अनुभव किया, जो राज्य प्रशासन में सबसे अधिक माना जाता है. खेमका की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें खास पहचान दिलाई है. 

आईएएस खेमका ने 2012 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया था, जब उन्होंने गुरुग्राम में एक जमीन सौदे की म्यूटेशन (स्वामित्व स्थानांतरण) को रद्द कर दिया. यह सौदा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा था. खेमका के फैसले ने उन्हें पूरे देश में चर्चा में ला दिया.

शिक्षा और करियर की शुरुआत

IAS अशोक खेमका का जन्म 30 अप्रैल 1965 को कोलकाता में हुआ था. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद, उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से पीएचडी और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में एमबीए की डिग्री ली. इसके साथ ही, सेवा के दौरान उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री भी पूरी की. 

2023 में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रस्ताव

आईएएस खेमका को अपने करियर में ज्यादातर ‘लो प्रोफाइल’ विभागों में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने करीब 12 वर्षों तक ऐसे विभागों में काम किया जहां अक्सर ध्यान नहीं जाता. इसके बावजूद, उन्होंने हमेशा ईमानदारी से काम किया और अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दी. 

2023 में, खेमका ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर कहा था कि वह भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सतर्कता विभाग का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा था, 'मैंने अपनी सेवा का बलिदान किया है ताकि भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके.' अशोक खेमका ने अपने करियर में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी ईमानदारी से समझौता नहीं किया. उनकी सेवा और निष्ठा हमेशा उदाहरण के रूप में रहेगी.