चंडीगढ़: हरियाणा की एक महिला कथित तौर पर ऑनलाइन डेटिंग ऐप टिंडर के जरिए हुए हनीट्रैप और निवेश धोखाधड़ी का शिकार हो गईं. मामले में आरोप है कि एक व्यक्ति ने खुद को सरकारी गुप्त विभाग में कार्यरत बताकर उनसे करीब 52 लाख रुपये से अधिक की रकम हासिल कर ली.
अब इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है. मामले के अनुसार नवंबर में महिला जज की मुलाकात टिंडर पर एक व्यक्ति से हुई, जिसने अपना नाम अभिमन्यु वशिष्ठ बताया. बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच करीबी संबंध बने.
आरोप है कि आरोपी ने खुद को प्रभावशाली और भरोसेमंद व्यक्ति बताते हुए निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया. बताया गया है कि आरोपी के कहने पर महिला जज ने विभिन्न बैंक खातों में 52 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर कर दी. आरोपी ने निवेश के बदले आकर्षक रिटर्न देने का वादा किया था लेकिन जब कोई लाभ नहीं मिला तो धोखाधड़ी का मामला सामने आया.
इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि शिकायत खुद महिला जज ने दर्ज नहीं कराई. इसके बजाय एफआईआर उनकी घरेलू सहायिका के नाम पर दर्ज कराई गई. शिकायत में घरेलू सहायिका ने दावा किया कि वह ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी का शिकार हुई है.
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने पर उसने सत्र अदालत का रुख किया. मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर ने पाया कि विवादित लेनदेन मुख्य रूप से न्यायिक अधिकारी के बैंक खातों से हुए थे, न कि घरेलू सहायिका के खातों से.
अदालत ने टिप्पणी की कि शिकायत में वास्तविक पीड़ित की पहचान स्पष्ट नहीं दिखती. अदालत ने यह भी कहा कि यदि न्यायिक अधिकारी ही पीड़ित थीं, तो उन्होंने सीधे अपने नाम से शिकायत क्यों नहीं की, यह जांच का विषय है.
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. अदालत के अनुसार, जांचकर्ताओं ने Tinder चैट, पूरी WhatsApp बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य अभी तक एकत्र नहीं किए हैं.