हरियाणा में प्रदूषण का खतरनाक कहर, फरीदाबाद और गुरुग्राम में मास्क बना मजबूरी; जानें कितना है AQI

फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत हरियाणा के कई जिलों में AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. प्रदूषण के कारण लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलना पड़ रहा है और स्वास्थ्य जोखिम लगातार बढ़ रहा है.

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Km Jaya

फरीदाबाद: हरियाणा के कई जिलों में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है और फरीदाबाद तथा गुरुग्राम में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं. फरीदाबाद के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार दर्ज किया जा रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 400 से 500 के बीच पहुंच गया है.

सेक्टर 15A और 16A जैसे इलाकों में धुंध और कोहरे के साथ हवा इतनी जहरीली हो गई है कि सुबह से शाम तक सांस लेना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है. गुरुग्राम में भी स्थिति अलग नहीं है और यहां प्रदूषण ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है.

अन्य जिलों में कैसी है स्थिति?

हरियाणा के अन्य जिलों की बात करें तो रोहतक, सोनीपत, पानीपत और पंचकूला में भी हवा बेहद खराब स्थिति में है. रोहतक में कई बार AQI 300 के पार पहुंच चुका है, जबकि सोनीपत में भी 277 से ऊपर के आंकड़े दर्ज किए गए हैं. कुछ इलाकों में हालात इतने बिगड़ गए कि हवा Hazardous श्रेणी में पहुंच गई, जिससे खुले में सांस लेना भी जोखिम भरा हो गया है.

डॉक्टरों ने क्या दी है सलाह?

सिरसा और अंबाला जैसे जिलों में भी हवा अस्वस्थ या खराब श्रेणी में बनी हुई है. डॉक्टरों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है.

फरीदाबाद और गुरुग्राम में ठंड की कमी, कोहरा और लगातार बढ़ता प्रदूषण हालात को और बिगाड़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की धूल, भारी ट्रैफिक, निर्माण कार्य और फैक्टरियों का धुआं प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह हैं. मौसम का साथ न मिलना भी हवा की गुणवत्ता सुधारने में बड़ी बाधा बना हुआ है.

प्रदूषण लोगों पर कैसा पड़ रहा असर?

प्रदूषण का असर लोगों की दिनचर्या पर साफ दिख रहा है. स्कूलों में बच्चों का बाहर खेलना लगभग बंद हो गया है और लोग घरों में खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं. एन95 मास्क पहनना अब आम बात हो गई है और बिना मास्क बाहर निकलना लोग जोखिम भरा मान रहे हैं.

क्या-क्या हो रही समस्या?

सुबह की सड़कों पर घना कोहरा छाया रहता है, जिससे वाहन चलाना भी तनावपूर्ण हो गया है. बुजुर्गों और बच्चों में खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती से नियंत्रण नहीं होगा, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है.

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