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India Daily

'पटाखों का इस्तेमाल करने वाले देशद्रोही,' मेनका गांधी ने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर दिया बड़ा बयान!

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी एक बार विवादों से घिर गई हैं. उन्होंने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
'पटाखों का इस्तेमाल करने वाले देशद्रोही,' मेनका गांधी ने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर दिया बड़ा बयान!
Courtesy: X

नई दिल्लीः भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी एक बार विवादों से घिर गई हैं. उन्होंने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है. उन्होंने अपने बयान में प्रदूषण के लिए दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए पटाखे जलाने वालों को देशद्रोही करार कर दिया. उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है. 

पटाखे जलाने वाले देशद्रोही क्यों?

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेनका गांधी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो लोग पटाखे जलाते हैं, उनके लिए उनके मन में देशद्रोही शब्द के अलावा कोई दूसरा शब्द नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि चाहे दिवाली हो, दशहरा हो, शादियां हों या क्रिकेट मैच पटाखों की वजह से हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि आम लोगों का सांस लेना मुशिकल हो जाता है. उनके अनुसार, दूसरों की सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना राष्ट्रविरोधी कृत्य के समान है.

पराली और गाड़ियों के तर्क को बताया झूठ

अक्सर दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा में जलने वाली पराली और गाड़ियों के धुएं को जिम्मेदार माना जाता है. हालांकि, मेनका गांधी ने इन कारणों को पूरी तरह नकार दिया है. उनका कहना है कि दिवाली से तीन दिन पहले तक दिल्ली की हवा बिल्कुल साफ रहती है, लेकिन दिवाली की रात को करोड़ों रुपये के पटाखे फोड़ने के बाद स्थिति बिगड़ जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केवल दिल्ली में ही 800 करोड़ रुपए के पटाखे जलाए जाएंगे, तो उसका नतीजा जहरीली हवा के अलावा और क्या होगा.

ग्रीन पटाखे एक छलावा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने पर भी मेनका गांधी ने असहमति जताई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुनिया में ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज नहीं होती. उन्होंने इसे केवल एक भ्रम बताया और कहा कि आतिशबाजी किसी भी रूप में हो, वह पर्यावरण के लिए घातक ही है.

धार्मिक संदर्भ और जनता से अपील

मेनका गांधी ने इस मुद्दे को भगवान राम के आगमन से जोड़ते हुए पूछा कि क्या राम और सीता के वनवास से लौटने पर आतिशबाजी की गई थी. वहीं उन्होंने जनता से अपील की है कि वे प्रदूषण के लिए केवल सरकार को दोष देने के बजाय खुद अपनी जिम्मेदारी समझें. उन्होंने कहा कि जो लोग सबसे ज्यादा पटाखे जलाते हैं, वही बाद में सरकार पर प्रदूषण को लेकर आरोप मढ़ते हैं. फिलहाल, उनके इस 'देशद्रोही' वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.