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India Daily

वायु प्रदूषण के बाद दिल्लीवालों पर मंडरा रहा छुपा हुआ खतरा, भूजल में मिला यूरेनियम का जहर

केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जांच किए गए 103 नमूनों में से 13 नमूनों में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई. इसका मतलब है कि हर आठ में से लगभग एक नमूना दूषित है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
वायु प्रदूषण के बाद दिल्लीवालों पर मंडरा रहा छुपा हुआ खतरा, भूजल में मिला यूरेनियम का जहर
Courtesy: pinterest

दिल्ली में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर और चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने आई है. राजधानी के कई इलाकों के भूजल में तय सीमा से ज्यादा यूरेनियम पाया गया है. यह केवल किडनी या हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि सीधे दिमाग, नर्वस सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है. विशेषज्ञ इसे दिल्ली के लिए एक “साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी” मान रहे हैं, क्योंकि इसका असर धीरे-धीरे होता है और शुरुआती दौर में लक्षण साफ दिखाई नहीं देते.

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट क्या कहती है

केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जांच किए गए 103 नमूनों में से 13 नमूनों में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई. इसका मतलब है कि हर आठ में से लगभग एक नमूना दूषित है. उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के साथ रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नांगलोई-राजपुरा जैसे इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है.

दिमाग और मानसिक संतुलन पर सीधा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी पीने से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है. इससे याददाश्त कमजोर होना, एकाग्रता में कमी, सीखने की क्षमता घटना और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. यूरेनियम शरीर में जमा होकर नर्व सिग्नल को बाधित करता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है.

क्यों कहा जाता है यूरेनियम को ‘साइलेंट किलर’

यूरेनियम को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर में जमा होता है और लंबे समय तक कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते. जब तक समस्या समझ में आती है, तब तक नुकसान काफी गहरा हो चुका होता है.

क्या है सुरक्षित सीमा

पेयजल में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कुछ इलाकों में यह मात्रा 59 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई है.

बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा

बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी गंभीर है. उनमें चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, मानसिक थकान और एकाग्रता की कमी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रभावित इलाकों में आरओ फिल्टर का उपयोग किया जाए, भूजल की नियमित जांच हो और सुरक्षित वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराए जाएं.