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होली पर दिल्ली पुलिस ने की सख्त कार्रवाई, 1200 से ज्यादा ड्रंक ड्राइवर पकड़े; 3725 चालान काटे

होली के दिन दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़ा अभियान चलाया है. 1,200 से अधिक ड्रंक ड्राइविंग चालान काटे गए, जबकि अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों में 3,725 चालान किए गए. पश्चिमी रेंज में सबसे ज्यादा मामले सामने आए.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: होली के रंगों और उल्लास के बीच दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया. शराब के नशे में वाहन चलाने वालों पर विशेष नजर रखी गई. पूरे शहर में चेकिंग पॉइंट लगाकर ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किए गए. पुलिस का मकसद था कि त्योहार की खुशी किसी दुर्घटना में न बदल जाए. इस अभियान में ड्रंक ड्राइविंग के 1,200 से ज्यादा मामले पकड़े गए और अन्य नियम तोड़ने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हुई.

विशेष अभियान की तैयारी

बुधवार को होली के मुख्य दिन पुलिस ने शहर के हर कोने में सक्रियता दिखाई. प्रमुख चौराहों, बाजारों और सड़कों पर बैरिकेड लगाकर गाड़ियां रोकी गईं. हर चालक का ब्रेथ एनालाइजर से टेस्ट हुआ. पुलिस की कई टीमें दिन-रात तैनात रहीं ताकि कोई भी नशे में गाड़ी न चला सके. अधिकारी बताते हैं कि त्योहार में ऐसी सख्ती जरूरी है. 

ड्रंक ड्राइविंग के सबसे ज्यादा मामले

आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी रेंज में ड्रंक ड्राइविंग के 297 मामले दर्ज हुए, जो सबसे ज्यादा हैं. सेंट्रल रेंज में 257, नॉर्दर्न में 256, ईस्टर्न में 208, साउदर्न में 117 और न्यू दिल्ली रेंज में 69 मामले सामने आए. कुल 1,200 से ज्यादा चालान ड्रंक ड्राइविंग के लिए काटे गए. पुलिस ने कहा कि नशे में ड्राइविंग सबसे बड़ा खतरा है.

अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों पर कार्रवाई

ड्रंक ड्राइविंग के अलावा सीट बेल्ट न लगाने, बिना हेलमेट बाइक चलाने, ट्रिपल राइडिंग और तेज रफ्तार जैसे मामलों में भी पुलिस सक्रिय रही. इन उल्लंघनों के लिए 3,725 चालान किए गए. ईस्टर्न रेंज में सबसे ज्यादा 740, वेस्टर्न में 672, साउदर्न में 646 और सेंट्रल में 627 चालान कटे. बाकी रेंज में भी सैकड़ों चालान जारी हुए.

सुरक्षा का दिया संदेश

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि होली जैसे मौके पर सड़क हादसे बढ़ जाते हैं, इसलिए यह अभियान चलाया गया. नशे में वाहन चलाने से दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. पुलिस ने लोगों से अपील की कि त्योहार मनाएं, लेकिन सुरक्षित तरीके से. इस अभियान से सड़कों पर अनुशासन बढ़ा और कई संभावित हादसे टल गए.