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कैंसर, इंसुलिन और रेबीज की 6 करोड़ की नकली दवाएं जब्त, दिल्ली में फर्जी लेबल लगाकर बेचाने वाले चार आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने मुखर्जी नगर में चल रही नकली दवा फैक्ट्री का खुलासा करते हुए 6 करोड़ रुपये की फर्जी दवाएं जब्त की हैं. चलिए जानते हैं कैसे हुआ इसका खुलासा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
कैंसर, इंसुलिन और रेबीज की 6 करोड़ की नकली दवाएं जब्त, दिल्ली में फर्जी लेबल लगाकर बेचाने वाले चार आरोपी गिरफ्तार
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के अवैध व्यापार से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय गिरोह को पकड़ा है, जो दिल्ली-NCR और पूर्वोत्तर राज्यों में जीवन रक्षक नकली दवाओं की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार था.

इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर में चल रही एक गुप्त निर्माण और रीपैकेजिंग यूनिट का भी भंडाफोड़ किया. इस मामले के सिलसिले में पुलिस ने गिरोह के सरगना सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह उन दवाओं को अवैध रूप से सीधे खुले बाजार में बेच रहा था, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं के लिए निर्धारित थीं.

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि मुखर्जी नगर इलाके में सरकारी आपूर्ति वाली दवाओं की रीपैकेजिंग और उन पर नकली लेबल लगाने का काम चल रहा है. इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने इंद्र विकास कॉलोनी में स्थित एक जगह पर छापा मारा. छापे के दौरान पुलिस ने उस जगह से भारी मात्रा में नकली दवाएं, सरकारी आपूर्ति वाली दवाएं, पैकेजिंग मशीनें और नकली लेबल बरामद किए.

यह गिरोह कैसे काम करता था?

आरोपी प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों से अवैध रूप से दवाएं हासिल करते थे. इन दवाओं पर सरकारी आपूर्ति – बिक्री के लिए नहीं लिखा होता था. फिर इन दवाओं से मूल लेबल हटा दिए जाते थे. मुखर्जी नगर में स्थित अवैध यूनिट में इन दवाओं पर नकली व्यावसायिक लेबल लगा दिए जाते थे.

इसके बाद इन दवाओं को दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम तथा मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के खुले बाज़ारों में बढ़ी हुई कीमतों पर बेचा जाता था. पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में 'हवाला' के जरिए किए गए वित्तीय लेन-देन के सबूत भी बरामद किए हैं.

कितनी दवाएं और मशीनें हुईं जब्त?

छापों के दौरान अधिकारियों ने लगभग ₹6 करोड़ मूल्य की दवाएं जब्त कीं. जिसमें हजारों टैबलेट, कैप्सूल, टीके और इंसुलिन कार्ट्रिज शामिल हैं. पुलिस ने 'Lenvatinib' (कैंसर की दवा) के 14,000 से ज्यादा कैप्सूल, 'Hepbest' की 7,900 गोलियां और 2,500 वैक्सीन की डोज़ (हेपेटाइटिस B के लिए), रेबीज से बचाव के लिए 953 शीशियां (रेबीज वैक्सीन) और Azithromycin की 6,000 गोलियों और Cefixime के बड़े स्टॉक वाली एक बड़ी खेप जब्त की है.

इसके अलावा डायबिटीज़ के मरीजों के लिए 315 इंसुलिन ग्लार्जीन कार्ट्रिज, सांप के जहर का एंटीसीरम इंजेक्शन, 18000 'Zerodol-SP' गोलियां और Human Albumin की 1,416 बोतलें भी बरामद की गईं.

कितने आरोपी हुए गिरफ्तार?

पुलिस ने इस सिंडिकेट से जुड़े चार मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है. 56 साल के मनोज कुमार जैन इस पूरे गिरोह का सरगना है और वह मुखर्जी नगर से अपनी गैर-कानूनी गतिविधियां चला रहा था. अन्य आरोपियों में हरियाणा के पंचकूला का 57 साल के राजू कुमार और प्रयागराज के रहने वाले 32 साल के विक्रम सिंह उर्फ ​​सन्नी और 35 साल के वतन शामिल हैं.