दिल्ली और एनसीआर एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में हैं. रविवार को प्रतिकूल मौसम के कारण वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई. दिल्ली का एक्यूआई 440 दर्ज किया गया, जो जनवरी में बीते दो वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है. हालात इतने बिगड़े कि देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में चार एनसीआर के रहे. प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पूरे एनसीआर में ग्रेप-4 के सख्त प्रतिबंध लागू हैं, लेकिन तात्कालिक राहत के संकेत कमजोर नजर आ रहे हैं.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 440 दर्ज किया गया, जो एक दिन पहले के 400 से काफी अधिक है. यह न केवल 2026 का अब तक का सबसे प्रदूषित दिन रहा, बल्कि जनवरी 2025 और 2026 का भी उच्चतम स्तर है. इससे पहले जनवरी 2024 में एक बार एक्यूआई 447 तक पहुंचा था. बढ़ते आंकड़े राजधानी की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं.
दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के कई शहरों की हवा भी बेहद खराब रही. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि फरीदाबाद और गुरुग्राम की हवा ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ के बीच रही. देश के पांच सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद पहले, दिल्ली दूसरे और नोएडा तीसरे स्थान पर रहा, जो पूरे एनसीआर के लिए चिंता का संकेत है.
सीपीसीबी के समीर एप के अनुसार दिल्ली के 37 सक्रिय निगरानी स्टेशनों में से 27 पर एक्यूआई 400 से ऊपर रहा. शेष 10 स्टेशन ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किए गए. बवाना क्षेत्र में एक्यूआई सबसे अधिक 476 रहा. ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण किसी एक इलाके तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी राजधानी इसकी चपेट में है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की गति और कम तापमान के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली सतह पर फंसे रहे. रविवार को दिल्ली के ऊपर स्मॉग की मोटी परत देखी गई. हवा न चलने से प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो सका और स्थिति और बिगड़ गई। अनुमान है कि सोमवार को हवा की गति बढ़ने से थोड़ी राहत मिल सकती है.
पूर्वानुमानों के अनुसार सोमवार को वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में लौट सकती है, लेकिन यह सुधार सीमित होगा. वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली के मुताबिक अगले छह दिनों तक हालात इसी दायरे में बने रह सकते हैं. इस बीच ग्रेप-4 के तहत निर्माण कार्यों, डीजल वाहनों और अन्य गतिविधियों पर सख्ती जारी रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी राहत के लिए मौसम के साथ-साथ उत्सर्जन नियंत्रण भी जरूरी है.