‘तुम काली कलूटी हो…’, पति ने की मारपीट तो देवर ने मारे ताने, संदिग्ध हालत में छत से गिरकर महिला की मौत
दिल्ली के इंद्रपुरी में एक महिला की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई. महिला के परिवार वालों का कहना है कि उसके ससुराल वालों ने उसकी हत्या कर दी. मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
महिलाओं के साथ हो रहे अपराध के मामले कम होते नजर नहीं आ रहे हैं. एमपी की ट्विशा शर्मा, ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर के बाद अब वेस्ट दिल्ली के इंद्रपुरी की वीणा की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई. मिल रही जानकारी के मुताबिक वीणा की मौत घर की तीसरी मंजिल से गिरने की वजह से हो गई.
वीणा के मायके वालों का आरोप है कि उनकी बेटी घर की छत से गिरी नहीं है, बल्कि उसका पति राजू और उसके देवरों ने उसे धक्का मार कर गिरा दिया. जिससे उसकी मौत हो गई. परिवार वालों ने बताया कि उसकी शादी के चार साल हो गए थे और अब भी वह अपने ससुराल में खुश नहीं थी.
ससुराल वालों पर लगाए गंभीर आरोप
महिला के परिवार वालों का कहना है कि शादी के बाद भी उसके ससुराल वाले लगातार कुछ न कुछ मांगते रहते थे. साथ ही वीणा को उसके रंग और रूप को लेकर ताना मारते थे. जिसके कारण वीणा परेशान रहती थी. वीणा के परिवार वालों ने बताया कि उनकी बेटी को उसका देवर काली कहकर तंज करता था. कहता था कि तुम काली कलूठी हो और मैं अपनी पत्नी सुंदर लाऊंगा.
इतना ही नहीं कई बार उसका पति और देवर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी करते थे. महिला सारी बातें अपनी बड़ी बहन को बताती थी लेकिन कभी भी पुलिस में शिकायत नहीं की. महिला की बहन का कहना है कि मंगलवार की रात वीणा ने उसे कॉल किया और रो रही थी . उसने अपनी बहन को अपने बेटे का ख्याल रखने को कहा और फोन काट दिया. जिसके बाद महिला के देवर ने कॉल कर के परिवार वालों को बताया कि वह छत से गिर गई है.
मामले की जांच कर रही पुलिस
इस मामले में परिवार वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हुए महिला के ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. महिला के माता-पिता का कहना है कि उसके ससुराल वालों ने दहेज के लिए उनकी बेटी की हत्या कर दी. वहीं बहन का कहना है कि वीणा हमेशा कहती थी कि उसके ससुराल वाले उसे मार देंगे.
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. एक ओर जहां लड़कियां चांद पर जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे देश में अभी भी दहेज की समस्या खत्म नहीं हो रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि कब तक महिलाओं के जीने का हक दूसरे के हाथों में होगा?