दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल कीर्तिनगर इलाके में 21 मशीनें लगाई गई हैं जो हवा को साफ करने का काम करेंगी. पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो पूरी दिल्ली में इस तरह की मशीने लगाई जाएंगी. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मशीनें लगाए जाने के बाद कीर्तिनगर का दौरा किया और देखा कि मशीनें कैसे काम करती हैं. इन मशीनों का चयन आईआईटी दिल्ली के इनोवेशन चैलेंज ने मंजूरी दी है. दावा किया गया है कि यह मशीन प्रदूषक तत्वों को निकालकर आसानी से प्रदूषण कम कर सकेगी.
ये मशीनें रेड लाइट या स्ट्रीट लाइट के पोल पर लगाई जा सकती हैं. पोल माउंटेड होने के कारण इनके लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जरूरत नहीं होगी. पहली बार दिल्ली में इस तरह की डस्ट कैचर मशीनें लगाई गई हैं. बताया गया है कि एक मशीन एक घंटे में करीब 3 लाख लीटर हवा साफ कर सकेगी. एक ओर से हवा मशीन के अंदर जाएगी और दूसरी ओर से साफ हवा बाहर निकलेगी. पॉल्यूटेंट्स मशीन में लगे डिब्बे में जमा होते रहेंगे. डिब्बे में ढाई किलो पॉल्यूटेंट्स इकठ्ठा होने के बाद मशील कंट्रोल रूम को सूचित करेगी. उसके बाद उस डिब्बे को निकाल दूसरा डिब्बा लगा दिया जाएगा और मशीन फिर से काम करना शुरू कर देगी. इक्ठ्ठे किए गए पॉल्यूटेंट को कम्प्रेस्ड करने के बाद ईंट बनाने की योजना है.
दिल्ली के कीर्ति नगर इलाके में लगाई गईं इन मशीनों को फिलहाल बिजली से चलाया जा रहा है, लेकिन भविष्य में इन्हें सौर ऊर्जा से चलाने की योजना है. पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद मशीनों के ऊपर सोलर प्लेट लगाई जाएंगी, ताकि सौर ऊर्जा से मशीनों को चलाया जा सके. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को लेकर गंभीर है. पायलट प्रोजेक्ट कामयाब रहा तो यह प्रयास बड़ी राहत देने वाला साबित होगा.