दिल्ली में लंबे समय से राशन कार्ड का इंतजार कर रहे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिली है. रेखा गुप्ता सरकार ने नए राशन कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि अब राशन कार्ड के लिए सालाना आय सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई है. सरकार का कहना है कि इससे ज्यादा जरूरतमंद परिवार खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा सकेंगे. साथ ही पुराने रिकॉर्ड की जांच में बड़ी संख्या में फर्जी, डुप्लीकेट और निष्क्रिय कार्ड मिलने के बाद 7.71 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं, जिससे अब नए आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं.
सरकार के मुताबिक राशन कार्ड की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया गया है. पहले केवल परिवार की आय का स्वघोषणा पत्र देना होता था जिससे कई लोग गलत जानकारी देकर योजना का लाभ उठा रहे थे. अब आवेदन से लेकर राशन वितरण तक हर स्तर पर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. राशन दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीनें और बायोमेट्रिक सत्यापन लागू किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे असली जरूरतमंदों तक सस्ता राशन पहुंच सकेगा और गड़बड़ियों पर रोक लगेगी. नए आवेदन ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए लिए जा रहे हैं ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे.
पुराने राशन कार्डों की जांच के दौरान सरकार को कई अनियमितताएं मिलीं. अधिकारियों के अनुसार करीब 1.44 लाख लोग तय आय सीमा में नहीं आते थे, फिर भी राशन ले रहे थे. इसके अलावा हजारों ऐसे कार्ड भी मिले जिनके धारक लंबे समय से राशन नहीं ले रहे थे लेकिन कार्ड सक्रिय थे. कई मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी, फिर भी उनके नाम सूची में बने हुए थे. डुप्लीकेट कार्डों की भी बड़ी संख्या सामने आई. इन सभी नामों को हटाने के बाद करीब 7.71 लाख नई जगहें खाली हुई हैं, जिन पर अब पात्र परिवारों को शामिल किया जाएगा.
सरकार ने नए नियमों के तहत पात्रता की शर्तें भी साफ कर दी हैं. जिन परिवारों के पास दिल्ली की पॉश कॉलोनियों में संपत्ति है जो आयकर भरते हैं या जिनके पास चार पहिया वाहन है उन्हें राशन कार्ड का लाभ नहीं मिलेगा. सरकारी नौकरी करने वाले परिवारों और दो किलोवाट से ज्यादा बिजली कनेक्शन रखने वालों को भी योजना से बाहर रखा गया है. अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का मकसद केवल जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है ताकि योजना का दुरुपयोग न हो.
सरकार ने पुराने 'पहले आओ, पहले पाओ सिस्टम को खत्म कर दिया है. अब जिला स्तर की समितियां तय करेंगी कि किस परिवार को पहले राशन कार्ड दिया जाए. इन समितियों में जिला मजिस्ट्रेट, स्थानीय विधायक और संबंधित अधिकारी शामिल होंगे. समिति हर आवेदन की जांच करेगी और जरूरत के हिसाब से प्राथमिकता सूची तैयार करेगी. इसके साथ ही 20 प्रतिशत वेटिंग लिस्ट भी बनाई जाएगी ताकि खाली होने वाली जगहों को तुरंत भरा जा सके. सरकार का दावा है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदन भी जल्द निपटाए जाएंगे और वास्तविक गरीब परिवारों को राहत मिलेगी.