नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन लगातार पांचवें दिन भी जारी है. इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठन के अध्यक्ष अभिजीत दीपके की तबीयत अचानक बिगड़ गई है. उन्होंने एक वीडियो जारी कर बताया कि पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ महसूस करने के बाद कराई गई ब्लड जांच में उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है. फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है. वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके ने समर्थकों और युवाओं से चिंता न करने की अपील की. उन्होंने देशभर में आंदोलन का समर्थन कर रहे लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा, तो उनकी उम्मीद है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जल्द पूरी हो सकती है.
अभिजीत दीपके ने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन के उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं के संयम और शांतिपूर्ण तरीके की सराहना की. उनका कहना है कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा और संगठन अपनी मांगों को लेकर पहले की तरह सरकार के सामने मजबूती से अपनी बात रखता रहेगा.
Abhijit Dipke says he is down with typhoid pic.twitter.com/wMOdGlBnmT
— Yeshi Seli (@YeshiSeli) July 25, 2026
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों पर वीडियो संदेश जारी कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने सहित कई कदमों का उल्लेख किया था. इस पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार छात्रों और युवाओं की चिंताओं के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्राथमिकता क्यों दे रही है. उन्होंने इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता दोहराई.
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनके अनुसार, पेपर लीक की घटनाओं की वजह न्यायिक प्रक्रिया की गति नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की कमियां हैं. उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र सबसे पहले जवाबदेही और व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.
आशुतोष रांका ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की मूल खामियों को दूर किए बिना पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती. उनका कहना है कि छात्रों को लंबे कानूनी वादों से अधिक तत्काल न्याय और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है. CJP का कहना है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई से होनी चाहिए.