नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली की अदालत ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत दी है. जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा के मामले में अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चार दशक बाद भी दंगा पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं. हालांकि इस बरी होने के बावजूद सज्जन कुमार अन्य मामलों में आज भी जेल में बंद हैं.
दिल्ली की विशेष अदालत के जज दिग विनय सिंह ने 22 जनवरी को मौखिक रूप से सज्जन कुमार को जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में बरी करने का आदेश सुनाया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा. विस्तृत और कारणयुक्त आदेश अभी जारी किया जाना बाकी है. इस मामले में आरोप था कि 1984 के दंगों के दौरान इन इलाकों में हिंसा भड़काने में सज्जन कुमार की भूमिका थी.
सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया. उन्होंने अदालत से कहा कि उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है और वे 'सपने में भी' इसमें शामिल नहीं हो सकते. उनके वकील ने दलील दी कि घटना के समय उनकी मौके पर मौजूदगी का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि 36 साल बाद नाम जोड़े जाने से केस की विश्वसनीयता कमजोर हो गई.
फैसले के बाद दंगा पीड़ितों के परिवारों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिली. कई परिजन अदालत परिसर में भावुक हो गए. एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा कि उनके परिवार के दस लोगों की हत्या हुई, लेकिन आज भी उन्हें न्याय नहीं मिला. परिजनों ने साफ कहा कि वे हार नहीं मानेंगे और इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे.
यह मामला दो एफआईआर से जुड़ा है, जो 2015 में विशेष जांच दल द्वारा दर्ज की गई थीं. पहली एफआईआर जनकपुरी की है, जहां 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या हुई थी. दूसरी एफआईआर विकासपुरी से जुड़ी है, जहां 2 नवंबर को गुरचरण सिंह को जिंदा जलाए जाने का आरोप है. अगस्त 2023 में अदालत ने दंगे और वैमनस्य फैलाने के आरोप तय किए थे.
इस मामले में बरी होने के बावजूद सज्जन कुमार अभी जेल में हैं. फरवरी 2025 में एक अन्य मामले में उन्हें सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' नहीं मानते हुए फांसी से इनकार किया था. इस सजा के खिलाफ उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.