सत्य निकेतन में इमारत ढहने की दुखद घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर के पेइंग गेस्ट (PG) भवनों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया है. 7 से 9 सितंबर के बीच निगम की टीमों ने कुल 1,252 पीजी इमारतों का सर्वेक्षण किया. अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष अभियान का उद्देश्य छात्रों और निवासियों के लिए अवैध व असुरक्षित ढांचों की पहचान करना है.
सर्वेक्षण के नतीजों में 1,201 इमारतें पूरी तरह सुरक्षित पाई गईं, जबकि 39 भवनों में मामूली और 9 इमारतों में बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत पाई गई. MCD ने 3 इमारतों को बेहद 'खतरनाक' घोषित किया है, जिनमें से एक को गिराने (ध्वस्तीकरण) का काम शुरू कर दिया गया है. इसके अतिरिक्त, G+4 (चार मंजिल से ऊपर) वाली 26 बहुमंजिला इमारतों को विशेष निगरानी में रखा गया है.
सुरक्षित दिल्ली के लिए MCD का सख्त एक्शन जारी।
— Municipal Corporation of Delhi (@MCD_Delhi) September 9, 2026
खतरनाक भवनों, अनधिकृत निर्माण और भवन उपनियमों के उल्लंघन के खिलाफ दिल्ली के सभी 12 जोनों में व्यापक प्रवर्तन कार्रवाई तेज की गई है। आज 34 भवनों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई, 17 संपत्तियां सील, 22 कारण बताओ नोटिस जारी और 4 ध्वस्तीकरण आदेश… pic.twitter.com/pbecfPCB8X
निगम ने असुरक्षित और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज करते हुए 12 जोनों में स्थित 35 अवैध इमारतों पर बुलडोजर चलाया. इस कार्रवाई के तहत नजफगढ़ में व्यापक तोड़फोड़ की गई, जबकि शाहदरा नॉर्थ, रोहिणी, नरेला और सिविल लाइंस में भी कई अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए. इसके अलावा, करोल बाग के दो बड़े गोदामों और वेस्ट जोन के एक होटल समेत कुल 9 संपत्तियों को सील कर दिया गया.
एमसीडी ने रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर भी शिकंजा कसा है. 1 जून से 3 सितंबर के बीच निगम ने 983 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और 464 संपत्तियों को सील किया. 404 कॉलोनियों में चलाए गए तीन महीने के विशेष सर्वे के दौरान 8,000 से अधिक रिहायशी मकानों में कमर्शियल गतिविधियों का पता चला है, जिन पर दिल्ली मास्टर प्लान के तहत कार्रवाई की जा रही है.