बिलासपुर: एक 82 साल की रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को साइबर ठगों ने पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर बुरी तरह ठगा है. ठगों ने उन्हें पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) को आतंकियों को पैसे भेजने का झूठा आरोप लगाया और डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये लूट लिए. यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है.
पीड़िता प्रोफेसर रमन श्रीवास्तव डीपी कॉलेज से रिटायर हो चुकी हैं. वे बिलासपुर के सिविल लाइन इलाके में रियल हेवन सोसाइटी में अकेली रहती हैं. उनका बेटा प्रशांत श्रीवास्तव मुंबई में एक एचआर कंसल्टेंसी कंपनी का डायरेक्टर है. 20 अप्रैल को प्रोफेसर रमन के व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई.
फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि आप प्रतिबंधित संगठन पीएफआई को आतंक फंडिंग कर रही हैं. इस बात से बुजुर्ग महिला बुरी तरह डर गईं. ठगों ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट और ईडी के फर्जी नोटिस भी भेजे. महिला को इतना डराया कि वे कुछ समझ नहीं पाईं. ठगों ने आरबीआई की जांच का बहाना बनाकर महिला को चार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा.
डर के मारे प्रोफेसर रमन ने 21 अप्रैल को 20 लाख 20 हजार रुपये, 22 अप्रैल को 34 लाख 20 हजार रुपये, 23 अप्रैल को 15 लाख 20 हजार रुपये, 24 अप्रैल को 35 लाख 20 हजार रुपये. इस तरह कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए. इस पूरे समय ठग लगातार वीडियो कॉल पर जुड़े रहे.
उन्होंने महिला को घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी और 7 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. वे बार-बार धमकाते रहे कि पैसे नहीं दिए तो जेल हो जाएगी. 27 अप्रैल को जब प्रोफेसर रमन ने अपने बेटे प्रशांत को फोन किया तो उनकी आवाज में घबराहट साफ थी. उन्होंने बताया कि पैसे न देने पर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. तब प्रशांत को शक हुआ. वे तुरंत मुंबई से बिलासपुर पहुंचे और पूरी बात जानकर सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है. साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे ठग बुजुर्गों को टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाकर डराते हैं और लगातार वीडियो कॉल पर दबाव बनाकर पैसे ऐंठते हैं.