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'वह हमारी दुनिया था', बेटे की मौत का गम नहीं झेल पाए माता-पिता; चार पेज का सुसाइड नोट लिख दी जान

दंपति अपने पीछे चार पन्नों का एक सुसाइड नोट और एक वीडियो मैसेज छोड़ गए थे. उन्होंने जो लिखा और कहा, वो हमारी पूरी दुनिया था.

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Edited By: Reepu Kumari
'वह हमारी दुनिया था', बेटे की मौत का गम नहीं झेल पाए माता-पिता; चार पेज का सुसाइड नोट लिख दी जान
Courtesy: Pinterest

छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसी खामोशी में जागा जिसे वो कभी नहीं भूल पाएगा. धारदेई में अपने साधारण से घर के आंगन में नीम के पेड़ की छांव में कृष्ण पटेल और उनकी पत्नी रमा बाई के शव एक साथ लटके हुए पाए गए, जो न केवल साड़ी के फंदे से बंधे थे, बल्कि उस शोक से भी बंधे थे जिसे वे अब और सहन नहीं कर सकते थे. जांजगीर-चंपा जिले के शिवरीनारायण पुलिस थाना क्षेत्र में सबसे पहले पड़ोसियों ने सन्नाटा छाते देखा. सुबह तक यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई. लोग स्तब्ध होकर इकट्ठा हो गए. कुछ लोग खुलकर रोने लगे, तो कुछ लोग वहीं जम कर खड़े रह गए.

दंपति ने लिखा चार पन्नों का सुसाइड नोट

दंपति अपने पीछे चार पन्नों का एक आत्महत्या पत्र और एक वीडियो संदेश छोड़ गए थे. उन्होंने जो लिखा और कहा, उससे पूरा समुदाय आहत है. उनके इकलौते बेटे आदित्य पटेल (21 वर्ष) की 2024 में मस्तुरी पुलिस थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. पेशे से राजमिस्त्री कृष्णा (48) और गृहिणी रमा बाई (47) के लिए आदित्य ही उनकी दुनिया था.

'वो हमारी दुनिया था'

अपने पत्र में कृष्ण ने लिखा कि आदित्य 'हमारे जीवन की नींव, हमारी दुनिया... एक आज्ञाकारी पुत्र और मित्र; थे. उन्होंने उन्हें ईश्वर का आशीर्वाद बताया, जिन्होंने उनके घर को हंसी से भर दिया और माता-पिता की तरह उनकी देखभाल की. लेकिन दुर्घटना के बाद घर में सन्नाटा छा गया. कृष्ण ने उस दिन के बारे में लिखा जब आदित्य एक ग्राम पुजारी के साथ मंदिर के काम और यज्ञ में सहायता करने गए थे. उन्होंने बताया कि आदित्य हिचकिचा रहे थे. लेकिन कृष्ण ने जोर देकर कहा, 'यह ईश्वर का काम है.' पत्र में उन्होंने इसे 'मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती' बताया.

'हम जीवित थे... लेकिन'

उन्होंने लिखा, 'वह मुझे हमेशा के लिए छोड़कर चला गया. हम जीवित थे... लेकिन मैं जी नहीं रहा था.' राहुद चौकी के पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि दंपति ने रविवार देर रात अपने आंगन में नीम के पेड़ से साड़ी बांधकर फांसी लगा ली. पेड़ के पास की दीवार से संकेत मिलता है कि उन्होंने आत्महत्या करने से पहले उस पर चढ़कर अपनी जान दे दी.

नहीं झेल पाए बेटे को खोने का दर्द

चौकी प्रभारी सत्यम चौहान ने बताया कि घटनास्थल से एक आत्महत्या पत्र बरामद हुआ है. इसमें दंपति ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि अपने इकलौते बेटे को खोने के असहनीय दुख ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए विवश किया. पिछले एक साल में, ग्रामीणों का कहना है कि दंपति एकांतप्रिय हो गए थे. वे शायद ही कभी मुस्कुराते थे. जिस आंगन में आदित्य कभी बैठते थे, वह अब खाली पड़ा था.

अपने अंतिम शब्दों में, कृष्ण ने लिखा कि एक वर्ष के कष्ट के बाद, उनके भीतर कुछ बदल गया था. पीड़ा गायब नहीं हुई थी; बल्कि उसका रूप बदल गया था.

'ईश्वर दयालु हैं'

उन्होंने लिखा, 'ईश्वर दयालु हैं. लंबे कष्टों के बाद अब मेरा मन शांत है. मैं उनकी ओर आकर्षित महसूस कर रहा हूं. मेरा भाग्य ईश्वर में विलीन होना है..

फांसी लगाने से पहले, कृष्णा और रमाबाई ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया. इसमें वे अपने वकील से शांत भाव से बात कर रहे थे. उन्होंने अनुरोध किया कि आदित्य की दुर्घटना के बाद प्राप्त मुआवजे की राशि उनके बड़े भाइयों, कुलभरा पटेल और जलभरा पटेल को हस्तांतरित कर दी जाए.

वीडियो में उन्होंने कहा, 'अगर हम जीवित न रहें, तो कृपया सुनिश्चित करें कि हमारे बेटे आदित्य के दावे की रकम हमारे बड़े भाइयों को मिले. यही हमारी विनती है.'

मौत से पहले वकील से बात

उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा, 'हम दोनों सचेत रूप से और स्वेच्छा से स्वयं को भगवान शिव को अर्पित कर रहे हैं. इसके लिए कोई भी दोषी नहीं है. कृपया प्रसन्न हृदय से हमें विदाई दें.'

और फिर से, 'हमारे लिए शोक मत करो. हम पूर्ण शांति, बिना किसी इच्छा के और आनंदित मन से इस दुनिया को छोड़ रहे हैं.'

सोमवार सुबह पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. शवों को नीचे उतारा गया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है.

नोट: अगर आपके मन में कभी सुसाइड करने का ख्याल आए तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं. इससे आप अपनी परेशानी का हल निकाल सकते हैं. इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 14416 है, जहां आप 24X7 संपर्क कर सकते हैं.