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कभी हाथ में थामी थी बंदूक, आज मॉडलिंग करने रैंप पर उतरी महिला नक्सल, वीडियो वायरल

रायपुर में आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सलियों ने कोसा सिल्क पहनकर रैंप वॉक की. उनका यह सफर हिंसा से मुख्यधारा, आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई जिंदगी की प्रेरक कहानी बना.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
कभी हाथ में थामी थी बंदूक, आज मॉडलिंग करने रैंप पर उतरी महिला नक्सल, वीडियो वायरल
Courtesy: @Ascetic_Yodha_7

नेशनल हैंडलूम डे 2026 के मौके पर रायपुर में आयोजित एक अनोखे फैशन शो ने लोगों का ध्यान खींचा. बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक कर अपनी नई पहचान की झलक दिखाई. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में जैसे ही वे मंच पर पहुंचीं, तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंज उठा.

हथियार की जगह हाथ में हुनर

इन महिलाओं की कहानी महज एक फैशन शो तक सीमित नहीं थी. कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जंगलों में हथियार के साथ जिंदगी बिताने वाली इन महिलाओं ने अब कोसा सिल्क और हाथ से बुने पारंपरिक कपड़ों को पहनकर मंच संभाला. उनका रैंप वॉक हिंसा से दूरी और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बन गया.

मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिभागी महिलाओं से मुलाकात की और उनसे बातचीत की. उन्होंने महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए उनके बेहतर भविष्य की कामना की. कार्यक्रम में हथकरघा और स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा देने के साथ उन महिलाओं की बदली हुई जिंदगी को भी सामने रखा गया.

वीडियो वायरल हुआ तो मिली तारीफ

7 अगस्त को हुए कार्यक्रम का वीडियो 13 अगस्त को सोशल मीडिया पर सामने आया. वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स ने महिलाओं के इस बदलाव की जमकर सराहना की. कई लोगों ने इसे सशक्तिकरण और पुनर्वास की मिसाल बताया. सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि कुछ साल पहले ऐसे दृश्य की कल्पना भी मुश्किल थी.

माओवादी पहचान से नई जिंदगी तक

एक यूजर ने इस सफर को बेहद असाधारण बताते हुए कहा कि यह बदलाव समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद मिले नए अवसरों को दिखाता है. कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में प्रतिभागियों के संघर्ष और उनके बदले हुए जीवन की चर्चा हुई. रैंप पर आत्मविश्वास से कदम बढ़ाती ये महिलाएं संदेश देती नजर आईं कि सही अवसर और सम्मान मिले तो अतीत की पहचान पीछे छोड़कर नई शुरुआत की जा सकती है.

फैशन शो से बड़ा संदेश

रायपुर का यह आयोजन इसलिए खास रहा क्योंकि यहां फैशन के साथ सामाजिक बदलाव की कहानी भी मंच पर दिखाई दी. कोसा सिल्क की चमक के बीच इन महिलाओं का आत्मविश्वास यह बताता नजर आया कि पुनर्वास सिर्फ हथियार छोड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्ति को सम्मान, रोजगार और समाज में नई जगह देने की प्रक्रिया भी है.