छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक विवादित मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोशल मीडिया पर एक कबाड़ माफिया आरोपी की तस्वीर जमकर वायरल हो रही है जिसमें वह थाने के अंदर वीआईपी ट्रीटमेंट पाता दिखाई दे रहा है. यह घटना कोनी थाने की है जहां कबाड़ कारोबारी अकबर खान नाम के आरोपी को आराम से थाने के भीतर बैठकर चाय पीते देखा गया और पुलिसकर्मी उसकी खातिरदारी में लगे नजर आए.
यह फोटो वायरल होते ही लोगों में भारी नाराजगी और गुस्सा देखा जा रहा है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि अवैध कबाड़ का धंधा चलाने वाले एक आरोपी के साथ पुलिस स्टेशन में इतना आदर-सत्कार और नरम रवैया क्यों अपनाया जा रहा है. इस तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह कोई संदेही नहीं बल्कि पुलिस का कोई खास मेहमान हो.
स्थानीय स्तर पर चर्चा और आरोपों के अनुसार इलाके में सक्रिय कबाड़ माफिया को कुछ पुलिस अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है. यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ पुलिसवालों को नियमित रूप से मिलने वाले पैसों के कारण ही यह अवैध धंधा बेधड़क चल रहा है. इस पूरे विवाद में हेड कांस्टेबल बालेश्वर तिवारी और कांस्टेबल अनुज जांगड़े की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
इस मामले ने पुलिस विभाग को इसलिए भी ज्यादा शर्मिंदा किया है क्योंकि इसकी टाइमिंग काफी अजीब है. इस घटना से ठीक दो दिन पहले ही बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अवैध कबाड़ डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद पुलिस ने कोनी इलाके में अवतार पैलेस के पास स्थित कबाड़ की दुकान पर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई की. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 170 के तहत एक मामूली मामला दर्ज किया जिसे लोग नाकाफी मान रहे हैं.
एएसपी ने दी सफाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने सफाई दी है. उन्होंने आरोपी को वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने के दावों को खारिज किया है। उनके मुताबिक, अकबर खान को केवल दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था. पुलिस ने यह भी बताया कि जांच के तहत उस विवादित कबाड़ दुकान को अब सील कर दिया गया है. बहरहाल इस सफाई के बाद भी यह वायरल तस्वीर बिलासपुर में अवैध कारोबार और स्थानीय प्रशासन के बीच के गठजोड़ पर बहस को गरमाए हुए है.