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छत्तीसगढ़ में रियल 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', वीडियो में देखें कोयला खदान को लेकर ग्रामीणों और पुलिस में झड़प

सरगुजा के परसोडी कला गांव में अमेरा कोल एक्सटेंशन खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीणों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया. बिना सहमति और अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए काम शुरू होने के आरोपों पर विरोध उग्र हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए.

Kanhaiya Kumar Jha
Edited By: Kanhaiya Kumar Jha
Sarguja Coal Mine ndia Daily
Courtesy: X/@Vikas0207

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बुधवार को अमेरा कोल एक्सटेंशन खदान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. लखनपुर क्षेत्र के परसोडी कला गांव में खदान विस्तार की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई. लोगों का आरोप है कि खदान का विस्तार बिना उनकी सहमति और भूमि अधिग्रहण की पूर्ण प्रक्रिया के किया जा रहा है, जिससे उनकी जमीन, पानी के स्रोत और घरों पर गंभीर खतरा पैदा होगा.

सुबह होते ही सैकड़ों ग्रामीण खदान गेट के पास इकट्ठा हो गए. विरोध के दौरान भीड़ का गुस्सा बढ़ता गया और हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए. कुछ लोगों ने लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और गुलेल के साथ पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. इस झड़प में करीब 40 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि कई ग्रामीणों को भी चोटें आईं. स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा.

ADM सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे

घटना की सूचना मिलते ही ADM सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और भीड़ को शांत करने की कोशिश की. प्रशासन का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे जा सकते हैं. अधिकारियों ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

क्या कहना है ग्रामीणों का?

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक खदान विस्तार से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं और उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, वे किसी भी तरह का काम आगे बढ़ने नहीं देंगे. उनका आरोप है कि खदान के विस्तार से आसपास की जमीन धंसने का खतरा बढ़ जाएगा और प्रदूषण भी तेज़ी से बढ़ेगा. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्हें बिना जानकारी के फैसले थोपे जा रहे हैं, जिसकी वे कड़ी विरोध करेंगे.

क्या कहा पुलिस ने? 

दूसरी ओर खदान प्रबंधन की ओर से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पुलिस की ओर से कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन हिंसा या कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि ग्रामीणों की सभी शिकायतें और चिंताएँ उच्च स्तर तक पहुंचाई जाएंगी और उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा.