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India Daily

बिहार में शिकस्त के बाद तेजस्वी यादव का यूरोप दौरा, विधानसभा सत्र छोड़कर परिवार संग छुट्टियों पर

राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता तेजस्वी प्रसाद यादव अपनी पत्नी राजश्री यादव और दो बच्चों कात्यायनी व इराज के साथ यूरोप रवाना हो चुके हैं.

Gyanendra Sharma
बिहार में शिकस्त के बाद तेजस्वी यादव का यूरोप दौरा, विधानसभा सत्र छोड़कर परिवार संग छुट्टियों पर
Courtesy: Photo- @rohitxsinghin

पटना:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन को मिली बुरी हार के महज तीन सप्ताह बाद राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता तेजस्वी प्रसाद यादव अपनी पत्नी राजश्री यादव और दो बच्चों कात्यायनी व इराज के साथ यूरोप रवाना हो चुके हैं. बताया जा रहा है कि यह निजी यात्रा क्रिसमस और नए साल के मौके पर की गई है, लेकिन इस दौरान उनकी विधानसभा सत्र से अनुपस्थिति ने बिहार की राजनीति में हंगामा मचा दिया है. 

विपक्षी दलों ने इसे जिम्मेदारी से भागना करार देते हुए तीखे सवाल उठाए हैं, जबकि आरजेडी कार्यकर्ता इसे “सामान्य पारिवारिक समय” बता रहे हैं. बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हुआ था. तेजस्वी, जो हार के बावजूद विपक्ष के नेता के रूप में चुने गए हैं, सत्र के पहले और दूसरे दिन सदन में दिखे.

 विधानसभा से गायब

उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरा भी. लेकिन 2 दिसंबर की शाम को वे दिल्ली के रुख कर चुके थे. अगले दिन 3 दिसंबर को राज्यपाल के संयुक्त अधिवेशन में उनकी गैरहाजिरी रही. 4 दिसंबर को धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान भी वे नदारद रहे. 

आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी की यह यात्रा पहले से तय थी और पार्टी की आंतरिक समीक्षा बैठकों से इसका कोई लेना-देना नहीं है. पार्टी में हार की समीक्षा का दौर चल रहा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर गलतियां सुधारने पर जोर दिया जा रहा है. कार्यकर्ताओं का मानना है कि तेजस्वी जल्द लौटकर मैदान पर उतरेंगे और 2026 के लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज करेंगे.

 विदेशी ब्रेक पर तेजस्वी यादव

14 नवंबर को आए चुनाव परिणामों ने तेजस्वी के सपनों पर पानी फेर दिया. महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम दलों) को कुल 35 सीटें ही मिलीं, जिसमें आरजेडी को महज 25 सीटें हासिल हुईं यह पार्टी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था. तेजस्वी ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते हुए 18 नवंबर को शपथ की भविष्यवाणी की थी, लेकिन नतीजे उलटे आए. राघोपुर सीट से वे खुद जीते, लेकिन गठबंधन को मुस्लिम-यादव वोट बैंक के अलावा अन्य वर्गों से समर्थन नहीं मिला.