बिहार भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक फेरबदल के तहत संजय सरावगी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हुआ. मिथिलांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय सरावगी दरभंगा सदर से लगातार छह बार विधायक रहे हैं.
पूर्व मंत्री रह चुके नेता को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, लेकिन संगठन ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संतुलन साधा है और आगामी चुनावी रणनीति के संकेत इसी नियुक्ति से जुड़े माने जा रहे हैं.
संजय सरावगी का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ. वे करीब एक दशक तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न दायित्व निभाते रहे हैं. इसके बाद 1999 में भाजपा के जिला मंत्री बने. 2001 में दरभंगा नगर मंडल के अध्यक्ष और 2003 में जिला महामंत्री के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम किया. जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ ने उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा बनाया.
2002 में सरावगी दरभंगा नगर निगम के वार्ड संख्या छह से पार्षद चुने गए. स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका ने उन्हें विधानसभा की राह दिखाई. फरवरी 2005 में उन्होंने पहली बार दरभंगा सदर से विधानसभा चुनाव जीता. इसके बाद नवंबर 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र में अपनी स्थायी राजनीतिक मौजूदगी साबित की.
विधानसभा में रहते हुए संजय सरावगी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. वर्ष 2017 में वे प्राक्कलन समिति के सभापति रहे. फरवरी 2025 में उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री बनाया गया था. हालांकि मौजूदा मंत्रिमंडल में उन्हें स्थान नहीं मिला. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन में उनकी नियुक्ति प्रशासनिक अनुभव का व्यापक उपयोग करेगी.
संजय सरावगी वैश्य समुदाय से आते हैं, जिसे भाजपा का कोर वोटर माना जाता है. मिथिलांचल में वे एक पुराने और चर्चित नेता के रूप में पहचाने जाते हैं. क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है. दिलीप जायसवाल की जगह जिम्मेदारी संभालते हुए वे संगठनात्मक निरंतरता भी बनाए रखेंगे.
प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने संजय सरावगी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं. नेताओं ने कहा कि उनके अनुभव और नेतृत्व से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी. उम्मीद जताई गई कि वे कार्यकर्ताओं को जोड़कर संगठन को और मजबूत करेंगे. पार्टी के भीतर यह संदेश भी गया है कि मेहनती संगठनकर्ता को शीर्ष जिम्मेदारी देकर सम्मान दिया गया है.