पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने बड़ा संदेश दिया है. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट पर शानदार जीत हासिल कर अपने राजनीतिक अभियान को नई मजबूती दी है. दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह चुनाव निराशाजनक साबित हुआ. पार्टी उम्मीदवार रेखा कुमारी न केवल तीसरे स्थान पर रहीं, बल्कि जमानत बचाने के लिए जरूरी वोट भी नहीं जुटा सकीं. नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.
मतगणना के सभी 32 चरण पूरे होने के बाद जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 19,324 मतों के अंतर से हराया. यह जीत प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर के लिए अहम मानी जा रही है और इसे जन सुराज के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
इस उपचुनाव में आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी को केवल 14,273 वोट मिले. जबकि कुल 1,30,313 वैध मतों के आधार पर जमानत बचाने के लिए कम से कम 21,719 वोट जरूरी थे. तय सीमा से काफी पीछे रहने के कारण उनकी जमानत जब्त हो गई. यह परिणाम आरजेडी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
रेखा कुमारी ने वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में 46,363 वोट हासिल किए थे और दूसरे स्थान पर रही थीं. इसी प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया था. राजनीतिक जानकारों को उम्मीद थी कि उनका स्थानीय नेटवर्क और कुछ सामाजिक वर्गों का समर्थन इस बार भी असर दिखाएगा. लेकिन उपचुनाव में यह समीकरण काम नहीं आया.
बांकीपुर सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी. इसी कारण यहां उपचुनाव कराया गया. नितिन नबीन इस सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं. ऐसे में इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा था. नतीजों ने साफ संकेत दिया कि मतदाताओं ने इस बार नया राजनीतिक विकल्प चुना.
बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है. जन सुराज की जीत ने पार्टी का मनोबल बढ़ाया है, जबकि आरजेडी को अपने संगठन और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है. आने वाले चुनावों में इस परिणाम का असर राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी देखने को मिल सकता है.