Bihar Election: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मंगलवार को NDA और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने उम्मीदवारों को हाईजैक करने और उन्हें डरा-धमकाकर चुनाव से बाहर करने का चलन शुरू किया है. प्रशांत किशोर की यह टिप्पणी बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले जन सुराज के तीन उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने के बाद आई है.
किशोर ने कहा कि जेएसपी, एनडीए के दबाव और धमकाने वाली रणनीति के आगे नहीं झुकेगी. उन्होंने कहा कि लोगों को पता होना चाहिए कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के साथ क्यों देखे गए और किन परिस्थितियों में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि पहले, एक आम धारणा थी कि चुनाव कोई भी जीते, भाजपा सरकार बनाएगी. विधायकों की खरीद-फरोख्त किसी से छिपी नहीं है. कैसे विधायकों को रिसॉर्ट और होटलों में ले जाया जाता है.
उन्होंने कहा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जनता की पसंद जेएसपी के उन उम्मीदवारों को बंधक बनाने में लगा है, जिनका कोई पुराना दाग नहीं है और जिनकी छवि साफ़ है. बदलाव लाने की कोशिश कर रहा एक गैर-राजनीतिक व्यक्ति क्या कर सकता है, अगर उसे अचानक गृह मंत्री का सामना करना पड़े और पीछे हटने के लिए भारी दबाव डाला जाए?
प्रशांत ने कहा कि जेएसपी के साथ समस्या मुख्यतः इसलिए है क्योंकि वह जनता के समर्थन वाले, स्वच्छ और जोशीले उम्मीदवारों के नए विकल्प के साथ यथास्थिति पर सवाल उठा रही है. एनडीए और इंडिया ब्लॉक, दोनों एक-दूसरे से नहीं डरते, क्योंकि उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विकल्पों की कमी से खेलने में मज़ा आता है. वे जेएसपी से डरते हैं, क्योंकि उन्हें स्वच्छ और अच्छे उम्मीदवारों से डर लगता है. जेएसपी के 95% से ज़्यादा उम्मीदवार स्वच्छ छवि वाले और उसके अपने कार्यकर्ताओं से हैं.
#WATCH | Patna, Bihar | Jan Suraaj founder Prashant Kishor says, "Over the past few years, the BJP has developed a reputation for forming the government regardless of who wins the election. Now, they've launched a new campaign in Bihar... The election process has begun, and if… pic.twitter.com/bkJxPzhdcT
— ANI (@ANI) October 21, 2025
किशोर ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) से इस खतरनाक प्रवृत्ति पर रोक लगाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मतदाताओं से बिना किसी डर और प्रलोभन के वोट देने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? उन्होंने कहा कि दानापुर (अखिलेश कुमार), ब्रह्मपुर (सत्य प्रकाश तिवारी) और गोपालगंज (शशि शेखर सिन्हा) में जेएसपी के तीन उम्मीदवारों ने सीधे या परिवार और दोस्तों के ज़रिए दबाव, ज़बरदस्ती और धमकी के कारण प्रचार शुरू करने के बाद अचानक नाम वापस ले लिया है. भ्रष्ट शासन को खत्म करने के लिए 240 उम्मीदवार अभी भी लड़ रहे हैं.
किशोर ने कहा कि एनडीए और विपक्ष ने साढ़े तीन दशकों तक यथास्थिति का आनंद लिया, लोगों को बंधक बनाकर रखा और किसी तीसरे विकल्प के अभाव में उनके साथ बंधुआ मज़दूरों जैसा व्यवहार किया, लेकिन अब उन्हें डर है कि जेएसपी उनके खेल में खलल डाल सकती है. उन्होंने कहा कि पटना साहिब के उम्मीदवार और गणितज्ञ केसी सिन्हा भी दबाव में हैं, लेकिन वो अपनी बात पर अड़े रहे और मैं उनका आभारी हूँ. 243 सीटों में से कुछ उम्मीदवार दबाव में टूट सकते हैं, लेकिन जेएसपी 1.5 करोड़ का परिवार है.