पटना: नीतीश कुमार ने राज्यसभा में शपथ ले ली है. अब वह आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं. बिहार की राजनीति में इस बदलाव के बाद नीतीश कुमार की जिम्मेदारियों में भी बदलाव आया है. मौजूदा नियमों के अनुसार नीतीश कुमार किसी सार्वजनिक पद पर रहते हुए एक साथ पेंशन और वेतन दोनों नहीं ले सकते.
चूंकि अब उन्हें सांसद के तौर पर वेतन मिलेगा, इसलिए उनके कार्यकाल की अवधि तक बिहार सरकार से मिलने वाली उनकी पेंशन रोक दी जाएगी. यह नियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी भी व्यक्ति को एक ही समय में सार्वजनिक कोष से दोहरा लाभ नहीं मिलना चाहिए.
राज्यसभा सदस्य के तौर पर नीतीश कुमार को लगभग ₹1.24 लाख से ₹1.25 लाख तक का एक निश्चित मासिक वेतन मिलेगा. इसके अलावा सांसदों को कई तरह के भत्ते और लाभ भी मिलते हैं. साथ ही सांसद के तौर पर उन्हें संसदीय सत्रों के दौरान ₹2,500 का दैनिक भत्ता मिलेगा. उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के खर्चों के लिए हर महीने ₹75,000, कर्मचारियों के वेतन के लिए ₹50,000 और स्टेशनरी के लिए ₹25,000 भी आवंटित किए जाते हैं.
पेंशन पाने के लिए पूर्व विधायकों या मुख्यमंत्रियों को हर साल एक घोषणा पत्र जमा करना होता है. इस घोषणा पत्र में उन्हें यह पुष्टि करनी होती है कि वे फिलहाल कोई लाभ का पद धारण नहीं करते हैं और न ही कोई सरकारी वेतन ले रहे हैं. चूंकि नीतीश कुमार अब सांसद के तौर पर काम करेंगे, इसलिए वे इस विशेष शर्त को पूरा नहीं कर पाएंगे. जिसके वजह से उनकी पेंशन अब रोक दी जाएगी.
यह निलंबन स्थायी नहीं है. एक बार जब नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर लेंगे या इस पद से हट जाएंगे तो वे एक बार फिर बिहार सरकार से अपनी पेंशन पाने के हकदार हो जाएंगे.
हालांकि नियम साफ तौर पर एक ही समय में वेतन और पेंशन, दोनों लेने पर रोक लगाते हैं, फिर भी RTI रिपोर्टों से ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कुछ राजनेताओं ने कथित तौर पर इन दोनों लाभों का फायदा उठाया है. ऐसे मामलों को वित्तीय अनियमितताएं या आर्थिक अपराध माना गया है.