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बिहार में 'सम्राट' युग की शुरुआत, कभी नीतीश के कट्टर विरोधी रहे; अब कैसे बने बीजेपी के 'चौधरी'

बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक बड़े युग का अंत हुआ और नए अध्याय की शुरुआत हुई. नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद भाजपा के सम्राट चौधरी को नया मुख्यमंत्री चुन लिया गया है. वह बुधवार सुबह 11 बजे पद की शपथ लेंगे.

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बिहार में 'सम्राट' युग की शुरुआत, कभी नीतीश के कट्टर विरोधी रहे; अब कैसे बने बीजेपी के 'चौधरी'
Courtesy: Social Media

पटना: बिहार की सियासी बिसात पर आज वह मोहरा चला गया जिसने पूरे राज्य की राजनीति का अलाइनमेंट बदल दिया है. लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद अब भाजपा के सम्राट चौधरी राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे. मंगलवार को पटना में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में आधिकारिक तौर पर सम्राट चौधरी को अपना नेता चुन लिया गया है. जानकारी के अनुसार, वह बुधवार सुबह 11 बजे पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे.

नीतीश कुमार के विदा होते ही सम्राट चौधरी अब राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार होगा जब भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में सरकार बनेगी और भाजपा का ही कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होगा.

दिग्गजों को पीछे छोड़ कैसे पहुंचे सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर?

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है. 1990 के दशक में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से अपनी पारी शुरू की थी और राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे. हालांकि, उम्र विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद वह जदयू में शामिल हुए और जीतन राम मांझी की कैबिनेट का हिस्सा रहे. 2018 में भाजपा में शामिल होने के महज 8 वर्षों के भीतर उन्होंने पार्टी के कई पुराने दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है.

'बिहार के चौधरी' और पिता की विरासत 

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज ओबीसी नेता रहे हैं. हालांकि सम्राट कभी आरएसएस की पाठशाला से नहीं निकले, लेकिन भाजपा में उन्होंने अपनी कार्यशैली से खुद को 'बिहार के चौधरी' के रूप में स्थापित किया. पार्टी ने उनके कोइरी (कुशवाहा) समाज की सियासी ताकत को भांपते हुए 2023 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया और अब राज्य की कमान सौंप दी है.

नीतीश के विरोधी से अब उनके उत्तराधिकारी तक 

दिलचस्प बात यह है कि सम्राट चौधरी को हमेशा नीतीश कुमार के कट्टर विरोधी के रूप में जाना जाता रहा है. माना जाता है कि वह उन नेताओं में अग्रणी थे जिन्होंने नीतीश की एनडीए में वापसी का विरोध किया था. लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि अब वही सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में बिहार की कमान संभालने जा रहे हैं.