menu-icon
India Daily

जयचंद ने घेर रखा होगा... चूड़ा-दही भोज में नहीं आए तेजस्वी, तेजप्रताप बोले-कई दलों से ऑफर

तेजस्वी यादव के भोज में शामिल न होने पर तेजप्रताप ने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की. उन्होंने कहा, वो नहीं आए, हो सकता है कि उन्हें जयचंद ने घेर रखा हो.

Gyanendra Sharma
जयचंद ने घेर रखा होगा... चूड़ा-दही भोज में नहीं आए तेजस्वी, तेजप्रताप बोले-कई दलों से ऑफर
Courtesy: Photo-Social Media

पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का पर्व हमेशा से खास मायने रखता है, जहां दही-चूड़ा के भोज के बहाने नेता अपनी ताकत का प्रदर्शन करते नजर आते हैं. इसी कड़ी में जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने अपने आवास पर आयोजित भव्य दही-चूड़ा भोज में सियासी और पारिवारिक संदेश एक साथ दिए.

इस अवसर पर तेजप्रताप ने अपने छोटे भाई और राजद नेता तेजस्वी यादव को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि वे तेजस्वी से यह अनुरोध करना चाहते हैं कि राजद (आरजेडी) का विलय जनशक्ति जनता दल में कर दिया जाए. उनका दावा है कि लालू प्रसाद यादव की मूल पार्टी जनशक्ति जनता दल ही है, और यही उसकी असली विरासत का प्रतिनिधित्व करती है.

जयचंद ने घेर रखा होगा...

तेजस्वी यादव के भोज में शामिल न होने पर तेजप्रताप ने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की. उन्होंने कहा, "वो नहीं आए, हो सकता है कि उन्हें जयचंद ने घेर रखा हो." यह बयान बिहार की सियासत में भाईचारे और राजनीतिक अलगाव के बीच चल रही खींचतान को दर्शाता है.

पिता लालू प्रसाद यादव के पहुंचने पर तेजप्रताप काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा, "पिता आ गए, उससे बड़ा कुछ नहीं है. उनका आशीर्वाद मिल गया." लालू यादव के साथ ही राज्यपाल और सत्ता-विपक्ष के कई प्रमुख नेता भी इस भोज में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन और भी चर्चा में रहा.

छोटे भाई तेजस्वी को निमंत्रण दिया था

तेजप्रताप ने बताया कि उन्होंने 13 जनवरी को खुद जाकर अपने पिता, मां और छोटे भाई तेजस्वी को निमंत्रण दिया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं को भी कार्ड भिजवाया गया था. कई नेताओं ने आकर आशीर्वाद दिया, जिसे तेजप्रताप ने सकारात्मक संकेत बताया.

यह दही-चूड़ा भोज महज एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि तेजप्रताप यादव की नई राजनीतिक पहचान और परिवार के भीतर चल रही खींचतान को उजागर करने वाला मौका साबित हुआ. जनशक्ति जनता दल के मुखिया के रूप में तेजप्रताप लगातार अपनी अलग राह बनाने की कोशिश में जुटे हैं, और यह आयोजन उस दिशा में उनका एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.