बिहार की राजनीति में बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है. पार्टी की बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि तेजस्वी यादव विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की ओर से संयुक्त उम्मीदवार होंगे.
काफी समय से यह चर्चा चल रही थी कि तेजस्वी को राज्यसभा भेजा जा सकता है. अब पार्टी की बैठक में मुहर लगने के बाद यह तय हो गया है कि वे बिहार से उच्च सदन की राजनीति में कदम रखेंगे.
बिहार से राज्यसभा की कुल पांच सीटों पर चुनाव होना है. विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) चार सीटें आसानी से जीत सकता है. ऐसे में पांचवीं सीट पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. विपक्षी खेमे ने इसी सीट के लिए तेजस्वी यादव को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है.
बिहार विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. महागठबंधन के पास अपने दम पर 35 विधायक हैं. इसमें RJD, कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल हैं. यदि अन्य विपक्षी दल जैसे AIMIM और BSP समर्थन देते हैं, तो विपक्ष का आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है और तेजस्वी की जीत संभव हो जाएगी. इसलिए इस चुनाव में विपक्ष की एकजुटता सबसे अहम मानी जा रही है.
पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव की राजनीतिक भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं. अब उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला पार्टी की नई रणनीति माना जा रहा है. कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे तेजस्वी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी, जबकि कुछ लोगों को लगता है कि इससे उनका राज्य की सक्रिय राजनीति से दूरी बढ़ सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि तेजस्वी यादव राज्यसभा पहुंचते हैं तो वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की आवाज को मजबूत कर सकते हैं. वहीं बिहार में विपक्ष के नेतृत्व की नई संरचना भी देखने को मिल सकती है. अब सबकी नजर राज्यसभा चुनाव और विपक्षी दलों की एकजुटता पर टिकी है, जिससे तय होगा कि तेजस्वी यादव उच्च सदन तक पहुंच पाते हैं या नहीं.